वैज्ञानिकों की चेतावनीः अब कोरोना से भी खतरनाक वायरस का डर, अगर बर्फ पिघली तो तबाह हो जाएगी हमारी धरती

कोविड-19 (Covid19) के कारण दुनियाभर में जो तबाही देखने को मिली है वो शायद ही भुलाई जा सके, लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसे एक और खतरे के प्रति दुनिया को आगाह किया है। जलवायु परिवर्तन के कारण यह खतरा पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार आर्कटिक महासागर की सतह के नीचे शीत युद्ध युग के परमाणु अपशिष्ट और घातक रोगजनक मौजूद (arctic could spread nuclear waste) हैं। ये तेजी से पिघलने वाली बर्फ की वजह से सतह के ऊपर जा सकते हैं। इनमें कई प्रकार के घातक वायरस (deadly virus) मौजूद हैं। वैज्ञानिकों की एक टीम ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन (Climate change) की वजह से आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean) की सतह के नीचे का दो तिहाई हिस्सा अगले दस वर्षों में नष्ट हो सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र औसत वैश्विक दर से तीन गुना अधिक गर्म हो रहा है। रिसर्चर्स ने 1995 से 1990 तक सोवियत यूनियन द्वारा वातावरण में 130 परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का जिक्र किया और बताया कि इसकी वजह से रेडियोएक्टिव पदार्थ पीछे रह गया है। परमाणु कचरे के साथ-साथ वर्तमान में बर्फ में सैकड़ों सूक्ष्मजीव जमे हुए हैं। अगर बर्फ पिघलती है तो इन सूक्ष्मजीवों के पिघले हुए पानी के मिलने और यहां मौजूदा वायरस के नए एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंस वेरिएंट बनने का खतरा है।साइंटिफिक जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, गहरी सतह में 100 से अधिक सूक्ष्मजीव पहले ही एंटीबायोटिक प्रतिरोधी पाए जा चुके हैं। यदि ये परमाणु कचरा पानी की सतह पर छोड़ा जाता है तो मनुष्यों और जानवरों के लिए जहरीला हो सकता है। बर्फीली जेल से रिहा होने पर यहां मौजूद हजारों साल पुराने वायरस सबके के लिए खतरा बन सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इस खतरो के प्रति दुनिया को चेताया है। एबरिस्टविथ यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी में रीडर डॉ अरविन एडवड्र्स ने एक बयान में कहा, आर्कटिक की जलवायु और पारिस्थितिकी में परिवर्तन ग्रह के हर हिस्से को प्रभावित करेगा क्योंकि यह कार्बन को वायुमंडल में वापस लाता है और समुद्र के स्तर को बढ़ाता है। उन्होंने कहा, ये समीक्षा इस बात की पहचान करती है कि ग्रह के गर्म होने से आर्कटिक से अन्य जोखिम कैसे पैदा हो सकते हैं। आर्कटिक लंबे समय से कई हानिकारक चीजों को जमाए हुए है, जो मानव जाति के लिए खतरा है। यदि यह परमाणु अपशिष्ट बर्फ पिघलने के कारण बाहर आते हैं जो दुनिया को नई मुसिबत का सामना करना पड़ेगा।
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