यहां शिव भक्त हिन्दू नहीं बल्कि आते हैं मुसलमान, कारण जानकर उड़ जाएंगे होश

धर्म चाहे कोई भी हो इंसानियत में भेदभाव नहीं सिखाता है, ईश्वर तो एक ही है बस उसके नाम अलग अलग है और यहीं कारण है की उसने हमें बनाया तो इंसान था लेकिन धरती पर आने के बाद हम हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन , बौद्ध, फ़ारसी और भी ना जाने किन किन समुदाय में बंट गए. धर्म के नाम पर खुद को भी अलग कर लिया लेकिन इसके विपरीत गुवाहाटी के ऐसे ही इंसान ऐसे भी हैं जो धर्म से ऊपर उठकर भगवन शिव की पूजा करते हैं, इनका नाम है मोतिबुर रहमान और उन का परिवार जो उत्तर गुवाहाटी के निवासी हैं। शायद यही कारण है के एक मुसलमान मोतिबुर रहमान के घर के निकट विराजमान हैं भगवान शिव I जिन की देख रेख मोतिबुर रहमान और उन का परिवार करता है। और यह सिलसला आज नहीं बल्कि सात पीढ़ियों से चला आ रहा है।उतर गुवाहाटी के रंगमहल के एक मुस्लिम गाँव में मोतिबुर रहमान के घर के पास विराजमान है भगवन शिव का एक छोटा सा मंदिर जिसे लोग भांगुरा थान कहते हैं। मुस्लिमों के इस गाँव में स्थित इस भांगुरा थान को पिछली सात पीढ़ियों से देख भाल करते आ रहे हैं मतिबुर रहमान और उनका परिवार। प्राकृतिक परिवेश के बीचों बीच स्थित इस थान को हर रोज सुबह फज़र की नमाज़ के बाद और शाम को मग़रिब की नमाज के बाद मोतिबुर रहमान साफ-सफाई करते हैं। साफ-सफाई करने के बाद ही होती है इस भांगुरा थान में पूजा। अक्सर पूजा में आस-पास के गाँव के हिन्दुओं के साथ साथ मुस्लिम भी शामिल होते है।मोतिबुर रहमान के परिवार का विश्वास है कि इस थान की वजह से उनका गाँव हर प्रकार के बुरे साये, बीमारी और दुसरे मुसीबतों से बचा हुआ है और गाँव में शांती है। 71 साल के मोतिबुर रहमान अपने पिता के गुजर जाने के बाद से इस थान की देख-भाल कर रहे हैं और उनके बाद उनका बेटा इस थान की देख-भाल करेगा। ये सिलसिला पिछले सात पीढ़ियों से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा। थान में हर रोज पूजा-पाठ के साथ साथ बड़े धूम-धाम से शिवरात्रि भी मनाई जाती है। गाँव के मुसलमान भी किसी शुभ काम के लिए निकलने से पहले मस्जिद में दुआ मांगने के अलावा भांगुरा थान में हाजरी देना और दीया जलाना नहीं भूलते हैं Iगाँव में रहने वाले हिन्दू भी मोतिबुर रहमान के इस काम में पूरा सहयोग करते हैं। यही कारण है की जहां मतिबुर रहमान और उन का परिवार भगवान शिव का पूरा ख्याल रखते हैं वहीं शायद उन के इस इंसानियत के जज्बे ने ही पूरे गाँव को हिन्दू-मुस्लिम एकता के धागे से बांधे रखा है।
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