इस मस्जिद आते हैं फरिश्ते, फिर होता है के काम,देखने वालों की हुई हालत खराब

कहते हैं खुदा या यूं कहें ईश्वर हर जगह होता है बस उसे सच्चे दिल से याद करने की जरूरत होती है। ईश्वर एक ऐसी शक्ति होती है जिसके दर पर जाने में असीम शांति प्राप्त होती है और आज हम आपको एक ऐसी है इबादत की जगह के बारे में बताएंगे जहां जाकर आपको ना सिर्फ शांति बल्कि जन्नत का एहसास होगा। जी हां हम बात कर रहे हैं शिलांग के गैरिसन मैदान के समीप लाबान इलाके में खूबसूरत ढंग से निर्मित यह विशाल मदीना मस्जिद की। जो सिर्फ और सिर्फ शीशे से बनी है जिससे दूर से देखकर लगता है मानों खुद ईश्वर के दर पर आप पहुंच गए हो. यह शीशे से बना भारत का पहला मस्जिद है। मदीना मस्जिद आकर्षक ढंग से शीशे के गुंबंदों और मीनारों से बना है। इस मस्जिद को बनाने में डेढ़ साल का वक्त लग गया। यह भारत का पहला शीशे से निर्मित मस्जिद है और पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे बड़ा मस्जिद है। मस्जिद में शीशे से की गई जटिल नक्कासी की वजह से मस्जिद का परिसर रात के वक्त रौशनी से जगमगाता रहता है। मदीना मस्जिद में 2000 नमाजियों के एक साथ नमाज़ पढने की व्यवस्था है। वहीँ महिलाओं के लिए भी मस्जिद में नमाज़ पढने की ख़ास व्यवस्था है।शीशे से बने इस खूबसूरत मस्जिद के निर्माण में 2 करोड़ रुपयों की लागत आई है। शिलांग मुस्लिम यूनियन और अन्य शुभचिंतकों से मिली राशि को भी मस्जिद के निर्माण में खर्च किया गया है।आपको बता दें की इस मस्जिद में “मेहरबाँ” नाम से एक अनाथालय भी चलाया जाता है। “मरकज़” या एक धार्मिक संस्थान भी यहाँ है जो इस्लाम धर्म की शिक्षा देता है। यहाँ एक पुस्तकालय भी है जहाँ धर्म की पुस्तकें उपलब्ध है।इस मस्जिद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में अधिकाँश मजदूर हिन्दू थे जो पक्ष्मी बंगाल के कूचबेहार से आये थे इसके साथ ही यह यह पहला ईदगाह है जिसके द्वार महिलाओं के लिए भी खुले है।
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