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आने वाले प्रलय का संकेत दे रहा uttrakhand का यह नरसिंह मंदिर


देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले में एक ऐसा मंदिर है जो हमेशा प्रलय के संकेत देता है। नरसिंह मंदिर जोशीमठ के नाम से मशहूर यह मंदिर भगवान नरसिंह को समर्पित है, जो लक्ष्मीपति भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापित भगवान नरसिंह की मूर्ती हर साल पतली होती जाती है। ऐसी मन्यता है कि कलयुग के अंत में हाथ पतला होकर टूटकर गिर जाएगा और इसके बाद प्रलय होगी। आदिगुरू शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना 8वीं सदी में की थी। शंकराचार्य ने स्वयं इस स्थान पर भगवान नरसिंह की शालिग्राम की स्थापना की थी। बताया जाता है कि इस मंदिर की मूर्ती का निर्माण राजा ललितादित्य युक्का पीड़ा ने करवाया था। हालांकि कुछ यह भी मानते हैं कि शालिग्राम से एकाएक यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। यहां भगवान नरसिंह एक एक कमल पर विराजमान हैं।यहां भगवान नरसिंह के साथ बदरीनाथ, कुबेर और उद्धव भी स्थापित हैं। इस मंदिर भगवान राम और सीता की मूर्ती भी विराजमान है।

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