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Manipur के daniel जीवों-पक्षियों को लेकर जुनूनी, शिकार छोड़ने के बदले शिकारियों को दे देते हैं पैसे


वादियों के बीच खूबसूरती को समेटे हुए तमेंगलांग, मणिपुर का छोटा सा शहर है। इन वादियों में डेनियल मकवान आैर उनकी पत्नी का घर जो एक अलग पहचान रखता है। मकवान को घर एेसे वन्य जीवों आैर दुर्लभ प्रकार के पक्षियों को ठिकाना है जो तस्कारों आैर शिकारियों के चंगुल से आजाद करवाए गए हैं। मकवान दंपत्ति को बचपन से ही वन्यजीवों आैर पक्षियों से गहरा लगाव रहा है। तो इसलिए छोड़ी अमेरिका की नौकरीबता दें कि शादी के बाद दोनों अमेरिका के मियामी में शिप पर जाॅब कर रहे थे। वे जब भी भारत आते थे तो मणिपुर के तमेंगलांग जरूर जाते थे। इस दाैरान जब वे वन्यजीवों के शिकारियों को देखते या तस्करों के हाथों किसी पक्षी को पिंजरें में कैद पाते थे तो उन्हें बहुत तकलीफ होती थी। इस कारण उन्होंने अपनी शिप की जाॅब छोड़ दी आैर तामेंगलांग आने का फैसला किया। ताकि वे यहां इन जीवों आैर पक्षियों को शिकारियों आैर तस्करों के हाथाें से आजाद करवा पाए। 30 से ज्यादा जीवों को बचा चुके हैं मकवान दंपत्ति आज ये दोनोें दाम्पत्ति पेंगोलिन से लेकर एशियार्इ जंगली कछुए जैसे 30 से ज्यादा जीवों को बचा चुके हैं। उन्होंने इन जीवों को इंफाल के जिआेलाॅजिकल पार्क आैर दूसरी जगहों पर भेज दिया हे ताकि वे संरक्षित रहे। राेचक रही है निजी जिंदगीडेनियल की निजी जिंदगी भी काफी रोचक रही है। मुंबर्इ में पढ़ार्इ के दाैरान मणिपुर की गलीना से मुलाकात हुर्इ। दोनों की ये मुलाकात शादी तक पहुंच गर्इ आैर दोनों दांपत्य सूत्र में बंध गए। शादी के बाद दोनों को अमेरिका में जाॅब मिल गर्इ। 2006 में गलीना तमेंगलांग अपने मायके आ गर्इ। वे टीचर बन गर्इं। 2016 में डेनियल अमेरिका से नार्थ र्इस्ट लौटे। पेंगोलिन को पांच हजार देकर बचाया यहां आने के बाद वे वन्य जीवों को बचाने में जुट गए। उन्हें जब भी शिकारी का पता लगता वे तुरंत वहां पहुंच जाते। अभी फरवरी में ही उन्होंने एक पेंगोलिन को शिकारी से छुड़ाया था। पेंगोलिन को बचाने के लिए डेनियल ने शिकारी को पांच हजार रुपए दिए। पिछलें दो सालों में उन्होंने एशियार्इ जंगली कछुए , चीनी पेंगोलिन, लीफ, टर्टल, लेपर्ड कैट, साही जैसे तकरीबन 30 जानवराें को छुड़ाया है।गौरतलब है कि डेनियल अभी तक 15 से ज्यादा जीवों आैर 16 से ज्यादा पक्षियों को संरक्षण दे चुके हैं। जीवों को जंगल में खतराडेनियल कहते हैं कि जीवों को बचाना मेरा पैशन है। उन्होंने बताया कि अब तक बचाए गए ज्यादातर जीवों को इंफाल नेशनल पार्क भेज दिया है क्योंकि जंगल में उनके शिकार का खतरा रहता हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें इस काम में कहीं से भी मदद नहीं मिलती है। उनका कहना है कि वे वन विभाग से मदद की उम्मीद करते हैं।

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