इस नौजवान के आइडिया पर फिदा हुए दिग्गज रतना टाटा, कर दी फंडिंग, जानिए पूरी कहानी

टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने खास स्टार्टअप को समर्थन किया है। दरअसल Goodfellows नाम की यह स्टार्टअप कंपनी युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को जोड़ने का काम करती है। मंगलवार को मुंबई में यह स्टार्टअप लॉन्च हुआ है। इस स्टार्टअप ने बताया कि उसे रतन टाटा की ओर से निवेश मिला है। इस स्टार्टअप का मोटो पीढ़ियों के बीच दोस्ती को बढ़ावा देना है।ये भी पढ़ेंः तो क्या बीजेपी में शामिल होने वाले हैं गुलाम नबी आजाद, जम्मू-कश्मीर अभियान समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के कुछ घंटे बाद ही दिया इस्तीफायह वरिष्ठ नागरिकों के लिए देश का पहला कम्पैनियनशिप स्टार्टअप है। इसका मकसद युवाओं और शिक्षित ग्रेजुएट्स को सहयोग के लिए जोड़कर बुजुर्गों की मदद करना है। पिछले छह महीनों में गुडफेलोज ने एक सफल बीटा पूरा कर लिया है। अब यह मुंबई और जल्द ही पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु में उपलब्ध होगा। इस नए स्टार्टअप के संस्थापक शांतनु नायडू हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पढ़े 25 साल के नायडू टाटा के कार्यालय में उप महाप्रबंधक हैं। 2018 से वह टाटा की सहायता कर रहे हैं। 84 वर्षीय टाटा ने नायडू के विचारों की सराहना की। इस मौके पर बोले कि जब तक आप वास्तव में बूढ़े नहीं हो जाते, तब तक किसी को भी बूढ़े होने का मन नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि एक अच्छे स्वभाव वाला साथी प्राप्त करना भी एक चुनौती है। वहीं, नायडू ने टाटा को एक बॉस, एक संरक्षक और एक मित्र के रूप में संबोधित किया।ये भी पढ़ेंः तो क्या भारत में रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने की तैयारी कर रही है मोदी सरकार, मिलेगा फ्लैट, एक ट्वीट से मची सनसनीशांतनु नायडू ने बताया कि इस स्टार्टअप का आइडिया उनको रतन टाटा के साथ उनकी खुद की घनिष्ठता से आया। उन्होंने कहा कि साढ़े पांच सालों के अंतर वाले दोनों लोगों की यह दोस्ती दो पीढ़ियों के बीच दोस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने बताया कि उनकी टाटा जैसे उम्र के लोगों से बनती है क्योंकि वो उनकी बुद्धिमत्ता, जिंदगी के एक-एक पल को जी लेने की जिजीविषा और इस उम्र की मासूमियत की ओर खुद को खिंचता हुआ पाते हैं।
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