नवाब मलिक ने ट्वीट किया समीर वानखेडे का बर्थ सर्टिफिकेट, कहा - उनके पिता का नाम दाऊद है

एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े (NCB zonal director Sameer Wankhede) सोमवार की रात नई दिल्ली पहुंच चुके हैं लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही है। इस बीच नवाब मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने जो बर्थ सर्टिफिकेट ट्वीट किया है वो असली है। उन्होंने कहा कि समीर वानखेड़े के पिता का (Name of Sameer Wankhedes father is Dawood Wankhede) असली नाम दाउद वानखेड़े है। उन्होंने कहा कि बीजेपी चाहे कितना भी कहें की हम मुसलमान के नाते इस लड़ाई को लड़ रहें हैं तो मैं कहना चाहता हूं की मैने 45 वर्ष के करियर में धर्म की सियासत नहीं की। जो बर्थ सर्टीफिकेट मैने पेश किया वो असली है। अगर आप उस सर्टीफिकेट को गौर से देखेंगे तो उसमें ऑलटर करके पॉइंटर्स जोड़े गए। हम डेढ़ महीने से समीर के डॉक्युमेंट्स सर्च कर रहे थे। तब जाकर इसकी कॉपी मिली। समीर वानखेड़े के पिता ने (Zahida married Sameer Wankhedes father) जाहिदा ने निकाह किया। बाप के सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की। कई दलित संगठन मुझसे बात कर रहे हैं। समीर के सर्टिफिकेट को लेकर स्क्रुटनी कमिटी के सामने शिकायत दर्ज कराएंगे। समीर के पिता अपना कास्ट सर्टीफिकेट सबके सामने रख रहें हैं। समीर का कास्ट सर्टिफिकेट कहां है? मुझे एनसीबी के एक अधिकारी ने मुझे खत भेजा था। इस खत को सीएम, डीजी और गृहमंत्री को भी दिया गया है। इस खत को हम डीजी विजिलेस को भेजेंगे। इस खत में 26 बातों का जिक्र है। उसकी जांच होनी चाहिए। क्रूज ड्रग्स मामले में समीर वानखेड़े सहित एजेंसी के कुछ अधिकारियों और अन्य द्वारा आर्यन को छोड़ने के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग किये जाने का एक गवाह ने आरोप लगाया था, जिसकी सतर्कता जांच के एनसीबी के आदेश के मद्देनजर वह (वानखेड़े) दिल्ली आए हैं। इस मामले में स्वतंत्र गवाह। प्रभाकर साईल ने रविवार को दावा किया था कि एनसीबी के एक अधिकारी और कथित तौर पर फरार गवाह केपी गोसावी सहित अन्य ने आर्यन खान को छोड़ने के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की है। सैल ने पत्रकारों से कहा था कि आर्यन को तीन अक्टूबर को एनसीबी कार्यालय लाने के बाद उन्होंने गोसावी को फोन पर सैम डिसूजा नामक एक व्यक्ति से 25 करोड़ रुपये की मांग करने और मामला 18 करोड़ रुपये पर तय करने के बारे में बात करते हुए सुना था, क्योंकि उन्हें ‘‘आठ करोड़ रुपये समीर वानखेडे (एनसीबी के जोनल निदेशक) को देने थे।
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