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नंदीग्राम चुनाव में अपनी हार नहीं पचा पा रहीं ममता बनर्जी, अधिकारी के खिलाफ याचिका, कोर्ट ने कही ऐसी बात


कोलकाता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई 24 जून के लिए टाल दी, जिसमें 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की नंदीग्राम जीत को चुनौती दी गई थी। मुख्यमंत्री ने अपने एक समय के सहयोगी रहे और अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रतिपक्ष अधिकारी के खिलाफ नंदीग्राम से चुनाव में उनकी जीत को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी और अदालत से चुनाव अमान्य घोषित करने का आग्रह किया था। बनर्जी ने अधिकारी के खिलाफ नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था और वह हार गईं थीं।अपनी याचिका में बनर्जी ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने अधिनियम की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण किया है, जिसमें रिश्वतखोरी, अनुचित प्रभाव, शत्रुता फैलाने, भारत के नागरिकों के बीच घृणा और शत्रुता को बढ़ावा देने, धर्म के आधार पर वोट मांगने इत्यादि के अपराध शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि 2 मई 2021 को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा की गई मतगणना प्रक्रिया में कई विसंगतियां और कदाचार थे। तदनुसार, बनर्जी और उनकी पार्टी के सहयोगियों ने वोटों की पुनर्गणना की मांग की थी। हालांकि, इस तरह के अनुरोधों को बिना किसी कारण के खारिज कर दिया गया और रिटर्निंग ऑफिसर ने फॉर्म 21 सी पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अधिकारी के पक्ष में चुनाव घोषित किया गया।याचिका में यह भी कहा गया है कि फॉर्म 17सी (रिकॉर्ड किए गए वोटों का लेखा-जोखा और मतगणना के परिणाम) की समीक्षा करने पर बनर्जी ने स्पष्ट विसंगतियां और गैर-अनुपालन पाया। याचिका में कहा गया है, नंदीग्राम में चुनाव संविधान और भारत में चुनावों को नियंत्रित करने वाले कानूनों के पूर्ण उल्लंघन में आयोजित किया गया। सुवेंदु अधिकारी ने कई भ्रष्ट प्रथाओं में लिप्त रहे, जिसने उनकी जीत की संभावनाओं को बढ़ाया और चुनाव में ममता बनर्जी की सफलता की संभावना को भौतिक रूप से बदल दिया। इसलिए, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 के अनुसार नंदीग्राम (एसी-2010) के पूर्वोक्त चुनाव को अमान्य घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, तृणमूल छोडकऱ भाजपा में शामिल हुए अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 मतों से हराया। अधिकारी को जहां 1,10,764 वोट मिले थे, वहीं बनर्जी को 1,08,808 वोट मिले थे. अधिकारी का वोट प्रतिशत 48.49 था जबकि बनर्जी का 47.64 था। न्यायमूर्ति कौशिक चंदा, जिन्हें शुक्रवार को मामले की सुनवाई करनी थी, ने मामले को 24 जून तक के लिए टाल दिया।

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