इस राज्य में भाजपा में बढ़ता जा रहा है असंतोष, खतरे में मुख्यमंत्री की कुर्सी, सहयोगी दल को बुलाया गया दिल्ली

त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में बढ़ते असंतोष के बीच पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भाजपा गठबंधन सहयोगी इंडिजीनियस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) को आदिवासी क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद नयी दिल्ली तलब किया है। पिछले महीने त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (एडीसी) चुनाव में शाही वंशज प्रद्योत किशोर देबबर्मन के जीतने के बाद भाजपा और आईपीएफटी का वजूद न के बराबर रह गया। आईपीएफटी के सहायक महासचिव मंगल देवबर्मा ने कहा कि उन्हें नड्डा ने 23 जून को नयी दिल्ली में आमंत्रित किया है और भाजपा अध्यक्ष नड्डा के साथ बैठक के बाद आईपीएफअी नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके लंबे समय से लंबित मुद्दों पर चर्चा कर बात करेंगे, जिनके आधार पर आईपीएफटी ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ गठबंधन किया था। हाल ही में जब तृणमूल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के खिलाफ असंतोष जताने के लिए त्रिपुरा में अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू करने की घोषणा की, तो पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने असंतोष को शांत करने के लिए अपने एक नेता को भेजा लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। केंद्रीय टीम ने अलग-अलग विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की प्रतिक्रिया को जाना था और पिछले साढ़े तीन वर्षों में सरकार के प्रदर्शन पर अपने सहयोगी आईपीएफटी के नेताओं के साथ चर्चा की थी। विधानसभा की 20 आदिवासी आरक्षित सीटों में से 19 विधायक होने के बावजूद आईपीएफटी हाल ही में संपन्न एडीसी चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। सत्तारूढ भाजपा आदिवासी परिषद के 28 सदस्यों में से नौ सीटों पर किसी तरह से जीत हासिल करने में सफल रही और भाजपा-आईपीएफअी गठबंधनी को आदिवासी क्षेत्रों में वोट फीसदी घटकर 30 फीसदी रह गया। शाही वंशज के टीआईपीआरए ने भाजपा-आईपीएफटी के पूरा वोट शेयर पर कब्जा कर लिया।
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