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हिमा दास की जीवनी बहुत कुछ कहती है, गरीबी की भट्टी में पक कर जीते हैं 5 गोल्ड मेडल


आज पूरे भारत को अपनी होनहार बेटी हिमा दास पर गर्व हो रहा है जिन्होंने 200 देशों के खिलाड़ियों को पछाड़ कर महज 19 दिन में 5 गोल्ड मेडल जीते हैं। लेकिन हिमा दास की जीवनी एक ऐसी कहानी है जिसको जानने के बाद हर कोई उनके जैसा बनना चाहेगा। बचपन से ही गरीबी जूझी हिमा ने नंगे पैर दौड़ना शुरू किया था, लेकिन दौड़ते वक्त पैरों में लगने वाले कांटों और पत्थरों की परवाह किए बगैर वो आगे बढ़ती रही और आज भारत का चारों और नाम रोशन कर रही है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि हिमा दास कौन है और कैसे इस मुकाम तक पहुंची।हिमा दास एक भारतीय एथलीट खिलाड़ी हैहिमा दास भारत एक भारतीय एथलीट खिलाड़ी है। उन्होंने महज 18 साल की उम्र में आइएए एफ अंडर 20 में एथेलिटक्स चैंपियनशिप में महिलाओ की 400 मीटर की रेस में पहला स्थापन प्राप्त करते हुए गोल्ड मेडल जीता और ऐसा करने वाली वो पहली महिला खिलाड़ी बनीं। यहीं से हिमा की सफलता रास्ता खुला और​ फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।हिमा दास का जन्म स्थान एवं शिक्षाहिमा दास का जन्म भारत के असम राज्य के नागौन जिसले के धिंग गांव में रहने वाले बहुत ही गरीब असमी परिवार में हुआ है। इसी गांव के नाम पर उन्हें धिंग एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता है। उनके पिता रोंजित दास तथा माता जोमोली दास है और दोनों ही क्रमश: चावल की खेती करने और घर संभालने का काम करते हैं। हिमा 6 भाई बहन हैं। उनकी शिक्षा भी गांव के ही छोटे से स्कूल में हुई।हिमा दास की जातिहिमा के नाम के आगे दास लगा होने के कारण उन्हें बंगाली समझते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। हिमा दास की जाति को लेकर यह भ्रम गलत है क्योंकि भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों में दास एक कॉमन सरनेम है। इस बारे मे खुद धिंग एक्सप्रेस भी कह चुकी हैं वो असम में पैदा हुई हैं और असमी ही रहेंगी।हिमा दास के संघर्ष की कहानीहिमा को खेलने का शौक बचपन से ही रह है और तब वो फुटबॉल खेलती थी। लेकिन इसके बाद उन्होंने रेसिंग में अपना कॅरियर बनाने की ठानी और गुवाहाटी स्टेट लेवल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इसमें उन्होंने और बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के 100 मीटर की रेस में कस्य पदक जीत लिया। बस फिर क्या था हिमा का हौसला बढ़ गया और आगे भी रेसिंग में ही ध्यान लगाने का मन बना लिया। इसके बाद वो जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए कोयंबटूर गई और फाइनल राउंड तक पहुँचने में कामयाब रही। इसके बाद उन्होंने प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेना शुरू किया।हिमा दास की सफलता की कहानीहिमा ने फेडरेशन कप में 400 मीटर में दौड़ लगाई और गोल्ड मैडल जीत लिया। इसी के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम के लिए अपना रास्ता बनाया और आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 कॉमनवेल्थ गेम में छठा स्थान प्राप्त किया। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी दौड़ी और गोल्ड जीत लिया। अब उनका सपना ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने का है।हिमा दास की उपलब्धियांउन्होंने आईएएएफ वर्ल्ड में अंडर 20 एथलीट चैंपियनशिप में 400 मीटर की रेस 46 सेकेंड पूरी की और गोल्ड मैडल जीता। हालांकि कॉमन वेल्थ गेम में 400 मीटर की दौड़ को 32 सेकंड में पूरा करके छठे स्थान पर रही। उन्होंने असम के गुवाहाटी में नेशनल इंटरस्टेट चैंपियनशिप में अंडर 20 वर्ग में गोल्ड मैडल जीता।हिमा दास की ताजा न्यूजधिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर हो चुकी हिमा दास ने महज 19 दिन में 5 गोल्ड मेडल जीतने का शानदार रिकॉर्ड बनाते हुए देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने चेक गणराज्य में हुए टाबोर ऐथलेटिक्स टूर्नमेंट में 200 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण जीता। इसके बाद बुधवार को हुई दौड़ को 23.25 सेकेंड में पूरा करते हुए फिर से गोल्ड जीता। इससे पहले 2 जुलाई को पोलैंड में हुई दौड़ को 23.65 सेकेंड में पूरा करते हुए गोल्ड जीता था। वहीं, क्लांदो मेमोरियल ऐथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने तीसरा गोल्ड मेडल अपने नाम किया। साथ ही 8 जुलाई को उन्होंने पोलैंड में हुए कुंटो ऐथलेटिक्स टूर्नमेंट में आयोजित हुई 200 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने चेक गणराज्य में नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां प्री में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में पहला स्थान प्राप्त करते हुए गोल्ड मेडल जीता।

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