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आखिर दुनिया की महाशक्ति अमरीका क्यों खाता है चीन से खौफ, हुआ सबसे बड़ा खुलासा


विश्व शक्ति बनने की दौड़ में चीन काफी तेजी से आगे भाग रहा है। देश की इकॉनोमी से लेकर तकनीकि तक किसी भी क्षेत्र में चीन कमजोर नहीं है। खुद को सुपर-पावर बनाने के प्रयास के बीच चीन पूरी दुनिया पर पैनी नजर रखता है। इसके उसके पास हैकर्स की लंबी-चौड़ी फौज है। ये लोग जासूसी के अलावा सुरक्षा को तोड़ने का भी काम करते हैं। चीन की साइबर वॉरफेयर ताकत पर साल 2013 में सबसे पहले पूरी दुनिया की नजर गई। उस दौरान अमरीका का साइबर सिक्टोरिटी से जुड़ी कंपनी मेनडिएंट ने चीन के कारनामों का खुलासा करते हुए बताया था कि कई हाई प्रोफाइल साइबर हमलों में चीन की साइबर फौज का हाथ था। कंपनी ने पूरे सबूतों के साथ बताया कि हमलों से पीपल्स लिबरेशन आर्मी का तीसरा डिपार्टमेंट जुड़ा हुआ था। बता दें कि ये चीन का इंटेलिजेंस ब्रांच है। इसे एक कोड 61398 के नाम से भी जाना जाता है। यही वो कोड है जो दुश्मन देशों पर साइबर अटैक करता है। इस कोड के बारे में दुनिया को बहुत कम जानकारी है, सिवाय इसके कि ये चीन के शेंगडू शहर से संचालित होने वाला विभाग है। ये कितना काबिल है, इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि इस कोड में काम करने वाले हैकर्स अलग-अलग हजारों सर्वर पर काम करते हैं। साल 2014 में इस कोड की बिल्डिंग 12 मंजिला थी और एरिया लगभग 130,000 स्क्वेयर फीट में फैला हुआ था। सीएनएन के मुताबिक तभी ही वहां हजारों हैकर्स काम करते थे। अब ये कम से कम एक लाख होंगे।साल 2017 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेंट्रल सेंट्रल कमिशन फॉर इंटेग्रेटेड मीलिट्री एंड सीवीलियन डवलपमेंट बनवाया। इसमें सेना के कामों में जनता यानी हैकर्स की भागीदारी तय की गई। इसी साल के आखिर में साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन सेंटर बना। इसका जिम्मा है भविष्य में होने वाली साइबर जंग में जीत हासिल करना। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी का मानना है कि सेना पर खर्च की बजाए दुश्मन देश को कमजोर करने के लिए साइबर वॉर छेड़ना कम खर्चीला है। साल 2019 में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस ने चीन के साइबर अटैकर्स की ताकत का अंदाजा लगाने की कोशिश की। इस दौरान वो खुद हैरान रह गया क्योंकि चीन में सेना के साथ-साथ साइबर आर्मी को भी बराबर महत्व मिलता है। इसमें एक से बढ़कर एक हैकर्स भरे हुए हैं, जिनका काम बंटा है। जैसे विभाग जासूसी करके खुफिया जानकारियां निकालता है तो कोई ग्रुप सॉफ्टवेयर में गड़बडियां पैदा करता है।

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