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एड्स का इलाज खोजने के चक्कर में पैद हुआ मौत का कोरोना वायरस


कोरोना वायरस कैसे खत्म किया जाए इसके ऊपर दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। वैसे कोरोना की अभी तक वैक्सीन तैयार नहीं हुई है। इसी के बारे में शोध कर रहे एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि आखिर कोरोना जैसा खतरनाक वायरस कैसे बना है। समाचार चैनल से बात करते हुए प्रो. लुक ने कहा कि कोरोना वायरस के जीनोम में मौजूद एचआईवी और यहां तक कि मलेरिया के कीटाणुओं के तत्वों की मौजूदगी इसकी ओर इशारा करती है। लुक ने जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना वायरस प्राकृतिक रूप से उत्पन्न हुआ नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि यह औद्योगिक हादसा है जो वुहान नेशनल बायोसेफ्टी लैब में हुआ है। उन्होंने दावा किया कि और सबको चौंका दिया कि वुहान सिटी लैब को इस तरह के कोरोना वायरस में साल 2000 से अध्ययन हो रहा है और इस बार सफल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि वायरस को खत्म करने के लिए तरंगों की थ्योरी (वेव थ्योरी) का प्रस्ताव भी दिया है। इस थ्योरी के बाद से पेरिस के एक वायरोलॉजिस्ट ईटियन साइमन का दावा है कि लुक की बात में तथ्य नहीं हैं। ऐसे जेनेटिक सीक्वेंस दूसरे कोरोना वायरस में भी पाए जाते हैं, कुछ जीनों के हिस्से पौधों या बैक्टीकिया जैसे भी लगते हैं। तो इसे औद्योगिक हादसा ना कह कर प्राकृतिक हादसा भी कह सकते हैं।
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