इन राज्यों में अनोखे अंदाज में मनाई जाती है होली, जानकर रह जाएंगे दंग

होली रंगो का त्योहार है। होली का त्योहार आने में कुछ ही समय बाकी है। ऐसे में लोगों ने होली की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। भारत देश में होली का त्योहार बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। साथ ही भारत के अलग-अलग शहरों में होली का त्योहार अलग तरीके से मनाया जाता है। आइए आपको बताते हैं वो जगह जहां आप होली का लुफ्त भी उठा सकते हैं और वहां की मान्यताओं के बारे में समझ सकते हैं।मणिपुर- मणिपुर में होली मनाने का तरीका काफी अलग है। पांच दिन चलने वाले इस त्योहार को याओसांग फेस्टिवल कहा जाता है। इन पांच दिनों में कई सारे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और बॉनफायर होता है। इस त्योहार को मनाते समय वहां के स्थानीय लोग एक कुटिया को जलाते हैं और उसके बाद सभी बच्चे घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करते हैं। दूसरे दिन वहां मंदिरों में बैंड का आयोजन किया जाता है और सभी जमकर नांचते हैं। आखिरी दो दिन पानी और रंगों वाली होली खेली जाती है।गोवा- गोवा में होली खेलने का मतलब है खूब सारी मस्ती और धमाल। गोवा में पांच दिन तक शिगमो-उत्सव चलता है, जहां विभिन्न प्रकार की परेड निकाली जाती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव के आखिरी दिन गोवा के सभी बीचों को रंगों से सजाया जाता है और वहां हजारों की संख्या में लोग गुलाल से होली खेलते हैं। शिगमो-उत्सव गोवा के पंजिम, वास्को और मडगांव में आयोजित किया जाता है।उदयपुर- उदयपुर की होली बड़े ही शाही अंदाज में मनाई जाती है। दो दिन तक चलने वाले इस त्योहार में मेवाड़ के राजा सभी अतिथियों का स्वागत करते हैं और उन्हें रॉयल सिटी पैलेस लेकर जाते हैं। पहले दिन बॉनफॉयर के माध्यम से होलिका दहन किया जाता है। उदयपुर की इस शाही होली की खासियत यह है कि यहां आपको राजस्थान की पूरी सभ्यता और परंपरा देखने को मिल जाएगी। सभी लोग राजस्थानी कपड़े पहने होते हैं और उनके परंपरिक लोकगीत की धुन पर नांचते हैं। वहां आए सभी अतिथियों को शाही भोज भी करवाया जाता है और उसके बाद खूब सारी आतिशबाजी होती है।बरसाना- बरसाना की लट्ठमार होली सबसे प्रचलित है। आपने इस प्रकार की होली कई सारी फिल्मों में देखी होगी, लेकिन जो आनंद वहां जाकर मिलता है वो किसी और तरीके से मिल ही नहीं सकता। बता दें, लट्ठमार होली बरसाना और नंदगांव में खेली जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण, राधा के साथ होली खेलने के लिए बरसाना आएं थे। वो अपने साथ अपनी पूरी पलटन भी लेकर आएं थे, तभी से ये प्रचलन बन गया कि नंदगांव के पुरुष कृष्ण बनके बरसाना आते हैं और वहां महिलाएं राधा के रूप में उनका इंतजार करती हैं, फिर प्रथा अनुसार वो महिलाएं पुरुषों पर लट्ठ बरसाती हैं। इसलिए इसे लट्ठमार होली कहते हैं। इस प्रकार की अनोखी होली का हिस्सा बनने का अलग ही मजा और अनुभव होता है।
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