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Arunachal की होली है सबसे खास, जो आपको बना देगा दीवाना


होली त्यौहार आते ही हर तरह रंगों से साथ साथ ख़ुशी और उमंग भी बाहर जाती है लोग दुश्मनी भूला कर एक साथ प्रेम के रंग में रंग जाते हैं और आज हम आपको भारत के खूबसूरत शहर अरुणाचल प्रदेश की होली के बारे में बताने जा रहे हैं। रंगों के त्योहार को होली कहते हैं तो वहीं अरुणाचल में इस उमंग के त्योहार को न्योकुम कहते हैं, एक ओर फर्क है होली और न्योकुम में वो यह कि होली पर आज कल भले ही मस्ती के साथ हुडदंग अधिक हो गई है।लेकिन वहां ये त्योहार पूरी तरह से पारंपरिक तरह से मनाया जाता है और वो भी पूरा गांव मिलकर मनाता हैं। 23 से 26 फरवरी को यह त्योहार अरुणाचल प्रदेश के याजाली गांव में मनाया गया और इस त्योहार के रंग आप यहां भी देख सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश के याजाली गांव में निशी समुदाय के लोग फसल की बुआई से पहले प्रकृति रूपी ईश्वर का आशीर्वाद लेने के लिए हर साल न्योकुम फेस्टिवल होली से पहले मनाया जाता है।फसल से पहले आशीर्वादन्योकुम में चार दिन तक मस्ती भरा माहौल रहता है, लेकिन इन सबके बीच समुदाय के मुख्य पुजारी लगातार मंत्रोच्चार कर प्रकृति को खुश करने की कोशिश करते हैं। अंतिम दिन पूरे गांव के लोग एक कार्निवल के तौर पर निकलते हैं और पूजा के मुख्य ग्राउंड तक पहुंचते हैं, जहां बलि देने के साथ पूजा संपन्न होती है।पूजा वाले दिन बारिश जरूरीइस समुदाय की मान्यता है कि मुख्य पूजा वाले दिन बारिश जरूर आती है, जो संकेत है कि ईश्वर आपसे खुश है और फसल अच्छी होने वाली है. पूजा खत्म होने के बाद शुरू होता है मस्ती का दौर, जहां कोई भेदभाव नहीं, कोई रोकटोक नहीं. हर कोई बस नाचने और गाने में मग्न रहता है।बुराई को खत्म करने का होहिका दहन तैसा ही तरीकाहोली से पहले होलिका दहन किया जाता है, जिसमें लोग अपने घर के सभी पुरानी चीजों का जला देते हैं। माना जाता है कि इससे घर के फैली नकारात्मक शक्ति और बुराइयों का अंत होगा। ठीक न्योकम त्योहार में बुराई का अंत करने के लिए कुछ ऐसा ही किया जाता है। लेकिन यहां घास फूस की तरह होलिका ना बनाकर एक व्यक्ति को शैतान रूप में खड़ा दिया जाता है और उसे गांव के लोग मारते (काफी हल्का प्रहार) हैं।

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