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Janmashtami 2018ः जन्माष्टमी के मौके पर गीता के ऐसे संदेश, जो जीवन में हर पल काम आएंगे


श्री कृष्ण के द्वारा दिया गया गीता का संदेश हर काल में उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि महाभारत काल में था। तो जन्माष्टमी के मौके पर आज हम आपको गीता के कुछ संदेशाें से रूबरू करवाएंगे। जिनमें से अगर एक भी आपके जीवन का हिस्सा बन जाए तो इससे बड़ा जन्माष्टमी व्रत नहीं हो सकता आत्मभाव में रहना ही मुक्ति है नाम, पद, प्रतिष्ठा, संप्रदाय, धर्म, स्त्री पुरुष हम नहीं हैं और न यह शरीर हम है। ये शरीर अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जाएगा। लेकिन आत्मा स्थिर है और हम आत्मा हैं। आत्मा कभी न मरती है। न इसका जन्म है और न मृत्यु! आत्मभाव में रहना ही मुक्ति है।ये है हमारे शत्रु अपने क्रोध पर काबू रखो। क्रोध से भ्रम पैदा होता है और भ्रम से बुद्धि विचलित होती है। इससे स्मृति का नाश होता है और इस प्रकार व्यक्ति का पतन होने लगता है। क्रोध, कामवासना और भय ये हमारे शत्रु हैं। इसलिए वर्तमान का आनंद लो, बीते कल और आने वाले कल की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जो होना है वही होगा। जो होता है अच्छा ही होता है। इसलिए वर्तमान का आनंद लो।जीवन की नियम है परिवर्तन परिवर्तन संसार का नियम है। यहां सब बदलता रहता है। इसलिए सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय, मान-अपमान आदि में भेदों में एक भाव में स्थित रहकर हम जीवन का आनंद ले सकते हैं। बंधन से मुक्त हो जाएंगेअपने को भगवान के अर्पित कर दो। फिर वो हमारी रक्षा करेगा और हम दुःख, भय, चिन्ता, शोक और बंधन से मुक्त हो जाएंगे।भगवान के लिए अर्पण कर दोसब कर्मों को भगवान के लिए अर्पण कर दो। ऐसा करने से हम सभी फलों से बच सकते हैं।हमारा नजरिया बदल जाएगाहमें अपने देखने के नजरिए को शुद्ध करना होगा और ज्ञान व कर्म को एक रूप में देखना होगा, जिससे हमारा नजरिया बदल जाएगा। वैराग्य को पक्का करते जाओअशांत मन को शांत करने के लिए अभ्यास और वैराग्य को पक्का करते जाओ, अन्यथा अनियंत्रित मन हमारा शत्रु बन जाएगा।कर्म करने से पहले विचार कर लेना चाहिएहम जो भी कर्म करते हैं उसका फल हमने ही भोगना पड़ता है। इसलिए कर्म करने से पहले विचार कर लेना चाहिए। हम अपना ही काम करेंकोई और काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि हम अपना ही काम करें। भले वह अपूर्ण क्यों न हो।दिनचर्या को व्यवस्थित करोअपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करो- आहार, विहार और हमारी चेष्टाएं संतुलित होनी चाहिए। साथ ही सोने और जागने का समय भी निश्चित करना चाहिए। वियोग का नाम योग हैसभी के प्रति समता का भाव, सभी कर्मों में कुशलता और दुःख रूपी संसार से वियोग का नाम योग है।

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