कांग्रेस विधायक ने किया कुछ ऐसा, कायल हो गए थे लोग

असम के जाेरहाट के मरियानी कस्बे के रहने वाले दिलीप डे नामक व्यक्ति के घर-परिवार में उनके दिव्यांग चचेरे भाई के अलावा कोई नहीं था। जब गुरुवार को दिलीप डे की मौत हुई तो उनकी अर्थी को कंधा देने के लिए लाेग कम पड़ गए। इस पर कांग्रेस के एक विधायक ने मृतक के शव को ना सिर्फ कंधा दिया, बल्कि मृतक के अंतिम संस्कार का भी पूरा इंतजाम किया। विधायक के इस कदम ने लोगों का दिल जीत लिया और लोग खुले दिल से विधायक की प्रशंसा कर रहे हैं।सच्चे दिल कर रहे हैं जनता प्रतिनिधित्व कांग्रेस के रुपज्योति कुर्मी जिन्होंने अपने इस काम से यह साबित कर दिया कि वे जनता का सच्चे दिल के साथ प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधायक रुपज्योति कुर्मी का कहना है कि वह दिलीप डे बेहद गरीब और अकेले थे। ऐसे में एक इंसान होने के नाते और लोगों का प्रतिनिधि होने के नाते मैंने यह जिम्मेदारी उठायी। मैं उनके लिए जो कर सकता था, उसके मुकाबले यह कुछ भी नहीं है। साफ छवि के विधायक है रुपज्योति कुर्मीबता दें कि जब दिलीप डे की मौत हुई तो उनके पड़ोसी रुपम गोगोई को इसकी जानकारी हुई। जिसके बाद रुपम ने ही विधायक रुपज्योति कुर्मी को इसकी सूचना दी। गौरतलब है कि स्थानीय लोगों के बीच विधायक रुपज्योति कुर्मी की छवि काफी अच्छी है। इससे पहले भी विधायक कई बार लोगों की मदद करते नजर आ चुके हैं। कंधे पर चावल की बोरी लादकर ले गए थे रिलीफ कैंपकहा जाता है कि जुलाई 2017 में भी जब असम में बाढ़ आयी थी, तब विधायक रुपज्योति कुर्मी ही अपने कंधे पर 50 किलो चावल की बोरी लादकर काजीरंगा नेशनल पार्क स्थित रिलीफ कैंप में लेकर गए थे। शुक्रवार को दिलीप डे का अंतिम संस्कार कराकर दिलीप डे ने एक अन्य स्थानीय ऑटो रिक्शा ड्राइवर की मां के जनाने को भी कंधा दिया।2006 में पहली बार बने थे विधायक रुपज्योति कुर्मी मारियानी विधानसभा सीट से 3 बार चुनाव जीत चुके हैं और साल 2006 में पहली बार विधायक चुने गए थे। रुपज्योति कुर्मी की मां भी इस सीट से विधायक रह चुकी हैं।
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