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भारतीयों के नाम छूटने पर टूटी प्रदेश भाजपा की नींद


गुवाहाटी । एनआरसी में बड़ी संख्या में हिंदीभाषियों के नाम छूटने पर अब प्रदेश भाजपा की नींद टूटी है। हालांकि प्रदेश भाजपा के विधायक अशोक सिंघल, वरिष्ठ नेता विजय गुप्ता समेत कुछ नेता अपने स्तर पर इस सवाल को उठा रहे हैं, लेकिन प्रदेश भाजपा ने पहली बार इस मसले पर अपनी गंभीरता दिखाई है। प्रदेश भाजपा ने भारतीयता प्रणाणित करने के दस्तावेजों की सूची में 13 ऩए दस्तावेज शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्रीय गृह मंत्रालय और एनआरसी समन्वयक को भेजा है। प्रदेश भाजपा ने एनआरसी के दूसरे मसौदे में भारतीय नागरिकों के नाम छूट जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है। पार्टी महासचिव पुलक गोहईं ने कहा है कि 1971 से पहले के कागजात होने के बावजूद प्रकृत भारतीय नागरिकों के नाम एनआरसी में छूट गए हैं और यह एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा है कि खिलांजिया असमिया, कोच राजवंशी, अनुसूचित जनजाति और चाय श्रमिकों के साथ देश के दूसरे राज्यों से आकर युग-युगांतर से रह रहे लोगों के नाम शामिल नहीं हुए हैं और एनआरसी समन्वयक ने 1986 में हुए नागरिकता संशोधन कानून को दरकिनार कर डी वोटर की संतानों को भी एनआरसी मसौदा से बाहर कर दिया है। बुधवार को पार्टी मुख्यालय में संवादाताओं को संबोधित करते हुए गोहाईं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एनआरसी के कागजातों की सूची तय कर चुका है। इसके अलावा पार्टी ने 13 अन्य दस्तावेजों की सूची एनआरसी संयोजक और गृह मंत्रालय को सौंपी है, जिससे स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 30 जुलाई को एनआरसी का दूसरा मसौदा जारी होने के बाद पार्टी ने एक छह सदस्यीय टीम का गठन किया था, जिसका कार्य जिला स्तर पर यह पता लगाना था कि कितने लोगों के और किस आधार पर नाम छूट गए। जहां देखा गया कि लाखों की संख्या में प्रकृत भारतीय नागरिकों के नाम वास्तविक दस्तावेज होने के बावजूद छूट गए है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का स्कूल में नामांकन 1975 में हुआ था तो निश्चित रूप से वह पांच या छह साल का रहा होगा। इसलिए इस तरह के कागजातों को सही माना जाना चाहिए। इसके अलावा माईग्रेसन स्रटिफिकेट, नागरिकता प्रमाण पत्र, रिफ्यूजी कार्ड, कैंप इनमेट कार्ड, रिफ्युजी प्रमाण पत्र, 1971 तक का ग्रेजिंग परमिट, 1971 तक का खुटी परमिट, दादा दवा्रा दिए गए राजस्व की रसीद, 1971 तक का पशुकर रसीद, 1971 तक का देवालय या दूसरे धार्मिक संस्थानों द्वारा जारी राजस्व रसीद को भी वैध कागजात माना जाना चाहिए।

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