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जन्माष्टमी 2018: इस तरह करें बाल गोपाल का जन्म, पूजा सामग्री में जरूर रखें ये चीजें


हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र और बड़े त्योहार जन्माष्टमी की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। श्रीकृष्ण के जन्म को धूम-धाम से मनाने के लिए कोई अपने बाल-गोपाल के लिए सुन्दर और चमकीले वस्त्र खरीद रहा है तो कोई सोने या चांदी की बांसुरी। इस साल जन्माष्टमी का पावन त्योहार दो दिन यानी 2 और 3 सितम्बर को मनाया जाने वाला है। 2 सितंबर को शाम 20:47 बजे के बाद अष्टमी तिथी शुरू होगी आैर 3 सितंबर को शाम 19:19 बजे तक रहेगी। बता दें कि भगवान विष्णु के कृष्ण आठवें अवतार थे, जिन्होंने धर्म की स्थापना के लिए मानव रूप में भाद्रपद की अष्टमी को अवतार लिया था। जन्माष्टमी के दिन भक्त जन उपवास रखते हैं आैर मंगल गीत के साथ कन्हैया का जन्म करवाते हैं। ताे आइए जानते हैं कि किस तरह करें भगवान कृष्ण का जन्म और पूजा सामग्री में कौन सी चीजें होनी चाहिए।पूजा सामग्रीभगवान कृष्ण की पूजा सामग्री में एक खीरा, एक चौकी, पीला साफ कपड़ा, बाल कृष्ण की मूर्ति, एक सिंहासन, पंचामृत, गंगाजल, दीपक, दही, शहद, दूध, दीपक, घी, बाती, धूपबत्ती, गोकुलाष्ट चंदन, अक्षत (साबुत चावल), तुलसी का पत्ता, माखन, मिश्री, भोग सामग्री।बाल गोपाल की श्रृंगार सामग्रीबाल गोपाल के जन्म के बाद उनके श्रृंगार के लिए इत्र, कान्हा के नए पीले वस्त्र, बांसुरी, मोरपंख, गले के लिए वैजयंती माता, सिर के लिए मुकुट, हाथों के लिए चूड़ियां रखें।इस तरह करें जन्मबाल गोपाल का जन्म रात में 12 बजे के बाद होगा। सबसे पहले आप दूध से उसके बाद दही, फिर घी, फिर शहद से स्नान कराने के बाद गंगाजल से अभिषेक किया जाता है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है। स्नान कराने के बाद आप मन में भक्ति भाव रखते हुए बिल्कुल छोटे बच्चों की तरह उनको लगोंटी जरूर पहनानी चाहिए। जिन चीजों से बाल गोपाल का स्नान हुआ है, उसे पंचामृत बोला जाता है। पंचामृत को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। फिर भगवान कृष्ण को नए वस्त्र पहनाने चाहिए।भगवान के जन्म के बाद के मंगल गीत भी गाएं। कृष्णजी को आसान पर बैठाकर उनका श्रृंगार करना चाहिए। उनके हाथों में चूड़ियां, गले में वैजयंती माला पहनाएं। फिर उनके सिर पर मोरपंख लगा हुआ मुकुट पहनाएं और उनकी प्यारी बांसुरी उनके पास रख दें। गाएं मंगल गीतअब उनको चंदन और अक्षत लगाएं और धूप-दीप से पूजा करनी चाहिए। फिर माखन मिश्री के साथ अन्य भोग की सामग्री अर्पण करें। ध्यान रहे, भोग में तुलसी का पत्ता जरूर होना चाहिए। भगवान को झुला पर बिठाकर झुला झुलाएं और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की का गाएं। साथ ही रातभर भगवान की पूजा करनी चाहिए।भगवान के जन्म का सही समयइस साल स्मार्तों के लिए व्रत जन्माष्टमी व्रत 2 सितंबर रविवार को होगा और वैष्णवों के लिए यानी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का व्रत 3 सितंबर सोमवार को होगा। सभी धर्मग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी, नक्षत्र एवं वृष राशिस्थ चन्द्रमाकालीन अर्धरात्रि के समय हुआ था।,

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