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अब छोड़िए पेट्रोल-डीजल की टेंशन आ गई हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली बस


रिसर्च एंड डेवल्पमेंट इनोवेशन करने वाली सेंटियंट लैब्स (Sentient Labs ) ने भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल (launched Indias first hydrogen fuel cell bus) बस लॉन्च की है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी को सीएसआईआर (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद)-एनसीएल (राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला) और सीएसआईआर-सीईसीआरआई (केंद्रीय विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान) के सहयोग से विकसित किया गया है। हाल ही में सेंटियंट ने दुनिया की पहली टेक्नोलॉजी की घोषणा की थी जो फ्यूल सेल से चलने वाली गाड़ियों में कृषि अवशेषों से सीधे हाइड्रोजन उत्पन्न करती है।हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी के अलावा, सेंटियंट लैब्स ने बैलेंस ऑफ प्लांट, पावरट्रेन और बैटरी पैक को भी डिजाइन और डेवल्प किया है। इन सभी कॉम्पोनेंट्स को 9 मीटर लंबी, 32-सीटर वाली, एसी बस में फिट किया गया है। इसे 30 किलोग्राम हाइड्रोजन के इस्तेमाल से 450 किमी की तक चलने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके डिजाइन में बदलाव कर इसकी रेंज को बढ़ाया भी जा सकता है।फ्यूल सेल बस को पावर देने के लिए हाइड्रोजन और हवा का इस्तेमाल करते है। बस से सिर्फ पानी निकलता है इसलिए यह पर्यावरण के लिहाज से ट्रांस्पोर्ट का सबसे अच्छा साधन कहा जा सकता है। वहीं लंबी दूरी के सड़कों पर चलने वाली एक डीजल बस आमतौर पर सालाना 100 टन CO2 का उत्सर्जन करती है। भारत में ऐसी दस लाख से अधिक बसें हैं।यह टेक्नोलॉजी पर्यावरण और आर्थिक लिहाज से भी अच्छी साबित हो सकती है। हाइड्रोजन बनाने की यह टेक्नोलॉजी किसानों के लिए पैसे कमाने का एक जरिया भी बन सकती है। डीजल बसों को हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों से बदलने से एयर क्वालिटी में सुधार होगा और इससे ऑयल इंपोर्ट कोस्ट भी कम होगी।सेंटियंट लैब्स के चेयरमैन रवि पंडित ने कहा, “हमें स्वदेशी रूप से विकसित हाइड्रोजन फ्यूल सेल पावर बस लॉन्च करते हुए गर्व हो रहा है। सीएसआईआर-एनसीएल के साथ एक मजबूत टेक्नोलॉजी टीम ने काम किया। यह हाइड्रोजन मिशन, आत्मनिर्भर भारत और महत्वपूर्ण रूप से सस्टेनेबल मोबिलिटी को मजबूत बनाने में एक लंबा सफर तय करेगा। हम कल्पना करते हैं कि हमारे प्रयास ऑटोमोबाईल कंपनियों को भारत में जीरो-कार्बन रास्ता बनाने में महत्वपूर्ण होंगे।”

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