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300 साल पहले इतना फैशनेबल था भारत, करोड़ों रुपए के चश्मे पहनते थे राजा, रत्न और हीरों का होता था इस्तेमाल


भारतीयों का फैशन से गहरा नाता रहा है। फिर बात कपड़ों की हो, गहनों की हो या फिर सौंदर्य साधनों की, ऐसे कई उदाहरण दुनिया के सामने हैं। इन्हीं में से एक हैं धूप के चश्में। 17वीं सदी (17th century glasses) में भी देश के मुगल शासक धूप के चश्में (Mughal rulers sunglasses) पहनते थे। इन चश्मों में रंगीन लेंस के लिए कांच की जगह कीमती रत्नों की पतली परत का उपयोग किया गया। इन्हें सोने के फ्रेम में बनाया गया और सुंदरता बढ़ाने के लिए इसमें डायमंड्स (diamond pair of glasses) लगाए गए। अब मुगल कालीन युग के ऐसे ही दो दुर्लभ चश्मों की लंदन में नीलामी होने जा रही है। इनमें से एक में पन्ने के लेंस लगे हैं, जिसे नाम दिया गया है गेट ऑफ पैराडाइज (Gate of Paradise)। वहीं दूसरे चश्मे में सफेद हीरे के लेंस है, जिसे हेलो ऑफ लाइन (Halo of Light) नाम दिया गया है। 22 अक्टूबर से इन्हें लंदन के सोथबी (Sotheby London) में प्रदर्शित किया जाएगा। नीलामी 27 अक्टूबर को होगी। सोथबी के अध्यक्ष एडवर्ड गिब्स के अनुसार भारत में 17वीं सदी के मुगल काल के एक अज्ञात राजसी खजाने से दुर्लभ रत्नों वाले चश्मे पहली बार नीलाम किए जाएंगे। चश्मों की शुरुआती कीमत पंद्रह करोड़ से पच्चीस करोड़ रुपए रखी गई है। यह भारत के असाधारण फैशन का उदाहरण हैं। माना जाता है कि यह पन्ना और हीरा दक्षिण भारत में गोलकुंडा की खदानों से निकाला गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि असली रत्नों से बने इन चश्मों का उपयोग नजरें ठीक करने के लिए किया जाता था। इतिहासकारों के अनुसार मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहां इतने रोए कि उनकी आंखें कमजोर हो गईं, जिन्हें ठीक करने के लिए पन्ने का इस्तेमाल किया गया था।

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