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आखिरकार नेपाल सरकार ने पहली बार चीन की करतूतों पर किया बड़ा खुलासा


नेपाल के प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में एक कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें उन्होंने हिमालयी जिले हुमला में चीन के साथ सीमा विवाद का डीटेल अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन किया है। कानून मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने कहा, हमला जिले के सीमावर्ती इलाके में समस्याओं का अध्ययन करने के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के समन्वय में सर्वेक्षण विभाग, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस और सीमा विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई है। मंत्री ने कहा, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि चीन ने पिछले साल नेपाली भूमि पर अतिक्रमण किया था और हुमला में नौ भवन बनाए गए थे। मुख्य जिला अधिकारी के नेतृत्व में एक सरकारी टीम ने भी साइट पर अध्ययन किया। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाले प्रशासन के दौरान विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन ने सीमा पर अतिक्रमण नहीं किया है। दरअसल साल 2020 के सितंबर महीने में खबर आई थी कि नेपाल का पड़ोसी देश चीन ने नेपाल के हुमला जिले के लिमी में कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है, और उसकी सीमा के भीतर नौ इमारतें बना ली हैं। इस अतिक्रमण के बाद नेपाल की राजधानी काठमांडू में चीन के दूतावास के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। जिसके बाद नेपाली विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि, डिपार्टमेंट ऑफ सर्वे ने नेपाल सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ज्वाइंट फील्ड इंस्पेक्शन किया और सीमा मानचित्र की जांच की और पाया कि इमारत नेपाली जमीन पर नहीं बनाई गई हैं।

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