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जालसाजी मामले में अदालत ने सुखबीर सिंह बादल को दिए सरेंडर करने के आदेश, पेश होने पर ही मिलेगी जमानत


होशियारपुर की एक अदालत ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को कथित जालसाजी मामले में अंतरिम जमानत पाने के लिए 13 सितंबर या उससे पहले सरेंडर करने का निर्देश दिया है। बलवंत सिंह खेरा द्वारा दायर यह मामला अकाली दल के कथित रूप से दो अलग-अलग पार्टी संविधानों से संबंधित है। इस मामले में पार्टी प्रवक्ता और पूर्व मंत्री डॉ दलजीत सिंह चीमा पहले से ही जमानत पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सुखबीर ने इस मामले में अपने वकील के जरिए जमानत की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिंदर पाल सिंह खुरमी की अदालत ने सुखबीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आवेदक को 13 सितंबर को या उससे पहले निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है और ऐसा करने पर उसे अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। अदालत ने आगे कहा कि जमानत शिअद प्रमुख द्वारा ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार के अधीन है। याचिका में सुखबीर बादल के वकील ने अदालत में कहा था कि अग्रिम जमानत मांगने वाले आवेदक के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले पिछले हफ्ते, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने होशियारपुर अदालत के समक्ष कार्यवाही के खिलाफ SAD द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें SAD अध्यक्ष सुखबीर बादल, पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और SAD प्रवक्ता डॉ दलजीत सिंह चीमा को तलब किया गया था। बलवंत सिंह खेरा द्वारा शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ कथित रूप से दोहरा संविधान रखने के लिए एक आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी। 2009 में यह आईपीसी की धारा 420,465,466, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत एक आपराधिक शिकायत दर्ज है। खेरा ने कहा कि इस मामले में उनका एकमात्र मुद्दा यह है कि शिअद भारत के संविधान के अनुसार एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं है क्योंकि इसके दो अलग-अलग संविधान हैं जो एक जालसाजी है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने चुनाव आयोग के साथ खुद को एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी के रूप में पंजीकृत कराया था, लेकिन वह धार्मिक निकाय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनावों में भाग लेती रही है।

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