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अखिलेश पर बरसे ओवैसी, कहा - मुसलमानों के हक में बोलने से डरते हैं, मुसलमानों का कोई नेता नहीं


ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सदर और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव मुसलमानों के हक में नहीं बोलते हैं। उन्हें डर है कि ऐसा करने से उनके वोट खिसक जाएंगे। हजारों की भीड़ के बीच ओवैसी ने करीब एक घंटे के अपने भाषण के दौरान यह समझाने का प्रयास किया कि उनके चुनाव लड़ने से कहीं भी भाजपा की सरकार नहीं बनती। कोलकाता, महाराष्ट्र और झारखंड समेत अनेक राज्यों के नाम गिनवाए और कहा कि वहां हम चुनाव लड़े थे लेकिन भाजपा की सरकार नहीं बनी। पूछा, अगर बीजेपी जीते तो उसके ज़िम्मेदार हम कैसे हो सकते हैं।पूर्व सांसद अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन कानपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। जाजमऊ के खुशबू मैदान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह टिकट लेंगी नहीं बल्कि बांटेंगी भी। शाइस्ता ने मंच पर अतीक अहमद के जेल से भेजे गए पत्र को पढ़ा जिसमें अतीक ने आरोप लगाया कि वह अखिलेश यादव की वजह से जेल में हैं। शाइस्ता ने कहा कि यह पत्र उनके पति ने प्रयागराज के लिए भेजा था। कानपुर के लिए भी पत्र आना था लेकिन आ नहीं सका। शाइस्ता ने पुत्र को अकारण फंसाने का भी आरोप लगाया और मंच पर आंसू बहाए। पत्र में अतीक ने ओवैसी को अपना नेता मानते हुए तारीफों के पुल बांधे।ओवैसी ने कहा कि न तो केंद्र और न ही उत्तर प्रदेश के चुनाव में मुसलमानों ने भाजपा का वोट दिया। फिर भी केंद्र में मोदी और राज्य में योगी की सरकार है। पूछा, उन्हें एकजुट होकर किसने वोट दिया। कानपुर में भाजपा का सांसद कैसे जीता। जिन्हें मुसलमानों ने 75 फीसदी वोट दिया उनके उत्तर प्रदेश में कुल 15 सांसद बने। यही हाल राज्य के चुनाव का रहा। कहा, हिंदुओं ने एकजुट होकर योगी, मोदी को वोट दिया इसलिए वह जीते। ओवैसी ने जातियों और नेताओं के नाम गिनाते हुए कहा कि हर जाति का नेता है, लेकिन मुसलमानों का कोई नेता नहीं। यूपी में 19 फीसदी मुसलमानों की आबादी है लेकिन नेता एक भी नहीं। संविधान तो नेता बनने का अधिकार देता है। उन्होंने अपने को मुसलमानों का नेता ठहराते हुए कहा कि एक ओवैसी नहीं पूरे प्रदेश में 100 ओवैसी चाहिए। यह जज़्बाती नारों से नहीं बल्कि मुत्तहिद होने से होगा। ओवैसी ने अखिलेश, मायावती और राहुल का नाम लेते हुए कहा कि वे मुसलमानों के हर मुद्दे पर बोलने से बचते हैं। सीएए का विरोध करते हुए सदन में काले कानून की प्रति हमने फाड़ी, बिना सुबूत गिरफ्तारी वाले कानून का विरोध हमने किया। मौलाना कलीम की गिरफ्तारी पर राहुल, माया, अखिलेश नहीं बोले क्योंकि उन्हें डर है कि दूसरों का वोट नहीं मिलेगा। बाबरी क्रिमिनल केस में फैसला आया तो सदन में हम अकेले बोले। ओवैसी ने कहा कि बकरी चोरी में आजम खां को जेल में डाल दिया। अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी को जेल में डाल दिया। 27 फीसदी मुसलमान जेलों में हैं। दलितों-मुसलमानों को बेरोजगार किया ओवैसी ने आरोप लगाया कि कानपुर की टेनरियां बंद कर साजिश की गई। दलितों और मुसलमानों को बेरोजगार कर दिया गया। कहा, हम देश के हर गरीब और कमजोर के साथ हैं। उन्होंने शहर में अंडरग्राउंड बिजली केबिल, रसोई गैस की महंगाई, कोरोनाकाल में ऑक्सीजन की कमी से हुईं मौतों का मुद्दा भी उठाया।

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