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टोक्यो ओलंपिक में जापान की महज 13 साल की बच्ची ने रच दिया इतिहास, जानिए कैसे


टोक्यो ओलंपिक के चौथे दिन टीनएज खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिला। स्केटबोर्डिंग के मुकाबले में 13-13 साल की खिलाड़ियों ने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते। जापान की निशिया मोमोजी ने स्वर्ण पदक जीता तो सिल्वर मेडल पर ब्राजील की रायसा लील ने कब्जा जमाया। कांस्य पदक जापान की 16 साल की फुना नाकायामा ने जीता। अपने पहले ही ओलंपिक में ये तीनों खिलाड़ी छा गईं। इन्होंने पदक जीतकर इतिहास रच दिया।स्‍केटबोर्डिंग उन चार खेलों में से एक है जो तोक्‍यो में पहली बार ओलिंपिक का हिस्‍सा बन रहे हैं। इसके अलावा सर्फिंग, स्‍पोर्ट क्‍लाइमिंग और कराटे को भी ओलिंपिक में शामिल किया गया है। मकसद ओलिंपिक को युवा दर्शकों तक पहुंचाना है। पोडियम पर जो तीन लड़कियां मौजूद थीं, उनमें से दो की उम्र 13 साल और एक की 16 साल थी। कुछ जानकार तो इसे ओलिंपिक का सबसे युवा पोडियम तक बता रहे हैं।निशिया इसी साल रोम में हुई वर्ल्‍ड चैम्पियनशिप्‍स में सिल्‍वर मेडल जीती थीं। अब उन्‍होंने खेल का सबसे ऊंचा मुकाम छू लिया है। ओलिंपिक में स्‍केटबोर्डिंग को शामिल करने का फैसला नई पीढ़ी के लिए इतना बड़ा मौका बनेगा, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। 13 साल की उम्र के गोल्‍ड और सिल्‍वर मेडलिस्‍ट हैं। कम उम्र के इन खिलाड़‍ियों ने दिखा दिया है कि उनमें दुनियाभर से लोहा लेना का ना सिर्फ जज्‍बा है, बल्कि प्रतिभा भी। तस्‍वीर में बाईं ओर दिख रही खिलाड़ी का नाम रेसा लील है। वो ना सिर्फ ब्राजील की, बल्कि पूरे ओलिंपिक खेलों में सबसे कम उम्र की मेडलिस्‍ट बन चुकी हैं। उन्‍होंने 14.64 के स्‍कोर के साथ सिल्‍वर जीता। मैच के बाद उन्‍होंने जबर्दस्‍त खेल भावना दिखाई जिसकी एक झलक ऊपर की तस्‍वीर में मिलती है।

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