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मिलिट्री टू मिलिट्री इंगेजमेंट करेंगे भारत और अमरीका, अब चीन की बढ़ेंगी मुश्किलें


चीन से चल रही तनातनी के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन तीन दिनों के भारत दौरे पर पहुंचे। उन्होंने बीती शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बाइडेन प्रशासन के किसी मंत्री का यह पहला भारत दौरा है, जिस पर दुनिया की नजरें हैं। वह अपनी यात्रा के दौरान वे आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिले। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। इस दौरान सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के चीफ भी मौजूद रहे।प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद जारी बयान में रक्षा राजनाथ सिंह ने कहा- भारतीय सेना और यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड, सेंट्रल कमांड, अफ्रीका कमांड के बीच हम सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। हमने LEMOA, COMCASA और BECA समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। संयुक्त बयान जारी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि रक्षा मंत्री ऑस्टिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ हमारी व्यापक और उपयोगी बातचीत हुई। हम व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए दृढ़ हैं। रक्षा-सहयोग पर व्यापक रूप से बातचीत, मिलिट्री टू मिलिट्री इंगेजमेंट बढ़ाने, सूचना साझेदारी और रक्षा और म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपॉर्ट के उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से चीन की टेंशन बढ़ जाएगी।बीते दिनों पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने अमेरिकी रक्षा मंत्री के इस दौरे को लेकर कई जानकारियां दी थीं। हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के सहायक कार्यवाहक रक्षा मंत्री डेविड एफ हेलवी ने बताया था कि ऑस्टिन अपने समकक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे और भारत अमेरिका के बीच बड़ी रक्षा साझेदारियों को मूर्त रूप देने के तौर-तरीकों पर चर्चा करेंगे। इसमें सूचनाओं का आदान प्रदान, क्षेत्रीय रक्षा समझौता, रक्षा व्यापार और नए क्षेत्रों में सहयोग भी शामिल है। लॉयड ऑस्टिन अपने समकक्ष राजनाथ सिंह के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों एवं नेताओं (एनएसए आदि) के साथ चर्चा कर सकते हैं। वह भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के साथ ही स्वतंत्र, समृद्ध और खुले इंडो-पैसेफिक क्षेत्र के माले पर भी बातचीत कर सकते हैं। बैठकों के दौरान दोनों देशों के सैन्य और रक्षा प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

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