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109 साल का हुआ बिहार, इन वर्षों में बिहार में ऐसी कई चीजें हुईं हैं जो देश के लिए नजीर बनी


बिहार आज 109 साल को हो गया है. इन सौ से अधिक सालों में प्रदेश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। पहले बंगाल से अलग होकर नया प्रदेश बनने फिर 1935 में ओड़िशा का अलग होना और अखिर में 2000 में झारखंड का अलग हो जाने का दंश झेल चुके बिहार ने बाद के सालों में कई क्षेत्रों में बुलंदियों को भी छुआ है। इतने वर्षों में बिहार में ऐसी कई चीजें हुईं हैं जो देश के लिए नजीर बना है। शाषण प्रशासन के कई मामलों से लेकर सामाजिक आंदोलन के क्षेत्र में बिहार देश का रोल माडल बना है। महिलाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में पंचायती राज संस्थानों में आधी आबादी को आरक्षण देने तथा सरकारी नौकरियों में उन्हें 33 फीसदी सीटें सुरक्षित करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू करने वाला भी बिहार देश का इकलौता राज्य है। अब कई प्रदेशों से शराबबंदी के बिहार माडल को लागू करने की मांग उठ रही है। सरकार ने हाल के दिनों में कई ऐसे भवन बनाये जो कला एवं निर्माण की दृष्टिकोण से उत्कृष्ट उदाहरण बन चुके हैं। बेली रोड पर बना बिहार संग्रहालय इनमें से एक है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बिहार दौरे के क्रम में से कुछ पल निकाल इस संग्रहालय को जाकर देखा. सभ्यता द्वार, विधानसभा का नया भवन और सरदार पटेल भवन ऐसे ही कुछ बेहतरीन उदाहरण हैं। एशिया का अनोखा ग्लास ब्रिज राजगीर में बन कर तैयार है। बिहार में चंपारण के तराइ इलाके से लेकर राजगीर, नालंदा, पावापुरी, बोधगया में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण के केंद्र हैं। लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जमीन पर उतरी योजनाओं में भी बिहार देश की अगुवायी कर रहा है। साइकिल, पोशाक और बैग व जूते के लिए पैसे दिये जाने से लेकर इंटर की परीक्षा पास करने पर 25 हजार और स्नातक की परीक्षा पास करने पर 50 हजार रुपये प्रोत्साहन भत्ता के रूप में दिये जाने संबंधी सरकार के फैसले ऐसे ही उदाहरण हैं। आजादी के बाद के आरंभिक दिनों में ही बिहार ने जमींदारी उन्मूलन कानून बनाया। पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल में तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री केबी सहाय की अगुवाइ में यह काम धरातल पर उतरा। पिछले डेढ़ दशकों में राज्य सरकार के कार्यों ने देश-विदेश में बिहार की अलग पहचान दिलाई । भ्रष्ट लोकसेवकों की संपत्ति को जब्त करने और उनमें सरकारी स्कूल खुलवाने, विधायक फंड की समाप्ति, पर्यावरण की रक्षा के लिए जल जीवन हरियाली योजना शुरू करने, शराबबंदी और बाल विवाह एवं दहेज मुक्त विवाह जैसे सामाजिक आंदोलन के पक्ष में विशाल मानव श्रृंखला बनाये जाने का रिकार्ड भी बिहार के ही नाम है। ब्यूरोक्रेसी के क्षेत्र में टॉप पर रहने वाले बिहार के अधिकारी भी भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख पदों को सुशोभित कर रहे हैं। यहीं नहीं, कई राज्यों के मुख्य सचिव व डीजीपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बिहारी मूल के ही अधिकारी काबिज हैं।

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