दुश्मनों से देश की रक्षा करने वाले जवानों का हाल हुआ सबसे बुरा, इस रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

देश की सीमाओं पर हर परिस्थिति का सामना करने वाले भारतीय सेना के जवान अपने ही अंतद्र्वन्द्व से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। शायद यही कारण है कि भारतीय सेना को हर साल दुश्मन की कार्रवाई के मुकाबले आत्महत्या, आपसी विवाद और अप्रिय घटनाओं के चलते अपने ज्यादा सैनिक जान गंवा रहे हैं।थिंक टैंक युनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार सेना हर साल खुदकुशी व अन्य घटनाओं के चलते करीब 100 से ज्यादा सैनिक जान गंवा रहे हैं। तनाव के चलते सैनिक उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, मनोविकार, न्यूरोसिस व अन्य बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। यूएसआई के सीनियर रिसर्च फेलो कर्नल ए के मोर का कहना है कि भारतीय सैनिकों के लंबे समय तक आतंकवाद और विद्रोह रोधी माहौल में रहना तनाव बढऩे के प्रमुख कारकों में से एक है। बीते दो दशक में ऑपरेशनल व नॉन ऑपरेशनल कारणों से भारतीय सैनिकों में तनाव का स्तर बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार बीते 15 साल में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने तनाव कम करने के विभिन्न उपायों को लागू किया, लेकिन इसके नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।तनाव के चलते इकाइयों व उप इकाइयों में अनुशासनहीनता, प्रशिक्षण की असंतोषजनक स्थिति, उपकरणों का अपर्याप्त रखरखाव की घटनाएं बढ़ी हैं और मनोबल गिरने के कारण उनकी लड़ाकू तैयारियों और ऑपरेशनल प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़े पदों पर तैनात अधिकारी इस तनाव से अछूते नहीं हैं। उनमें तनाव बढऩे के प्रमुख कारणों में नेतृत्व की गुणवत्ता में कमी, प्रतिबद्धताओं का बोझ, अपर्याप्त संसाधन, पोस्टिंग व पदोन्नति में पारदर्शिता व निष्पक्षता की कमी और अव्यवस्थाएं शामिल हैं।रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना के जवानों के तनाव का सबसे बड़ा कारण है छुट्टियां न मिलना। जेसीओ और अन्य रैंक के अधिकारी छुट्टी न मिलने या मिलने में देरी, अत्यधिक व्यस्तता, घरेलू समस्याएं, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपमान, गरिमा की कमी, मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर अनुचित प्रतिबंध, मनोरंजन सुविधाओं में कमी के चलते तनाव बढ़ रहा है।
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