किसान जीतेगा या मरेगाः आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट करेगा कृषि कानून याचिकाओं पर की सुनवाई

दिल्ली में नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान यूनियनों का विरोध प्रदर्शन तेज होता जा रहा है। किसान नरम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों और आंदोलन को चुनौती देते हुए कई दलीलों को सुनने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच, किसानों के विरोध से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। बता दें कि दो बार विज्ञान भवन में बैठक के बाद केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के बीच विचार-विमर्श से इस मुद्दे का कोई हल नहीं निकल पाया है। केंद्र और किसान यूनियनों के बीच 7 जनवरी को हुई बातचीत के 8वें दौर का कोई भी सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका क्योंकि सरकार ने विवादास्पद कानून को निरस्त करने से इनकार कर दिया था। अब विवादास्पद कानून को लेकर केंद्र और किसान नेताओं की बैठक 15 जनवरी को होने वाली है। सर्वोच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2020 को केंद्र और आंदोलनकारी किसानों के बीच बातचीत को सक्षम करने के लिए नए कृषि कानूनों को रखने के विचार का सुझाव देते हुए किसानों के अहिंसक विरोध को स्वीकार कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह तीन कृषि के कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध में हस्तक्षेप नहीं करेगा। इसी के साथ यह भी कहा कि हम इस स्तर पर विचार कर रहे हैं कि किसानों के विरोध को बिना किसी बाधा के और बिना किसी शांति के प्रदर्शनकारियों या पुलिस द्वारा जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। अब आज कोर्ट में क्या होता है सके बारे में सभी किसानों और पूरे देश को इंतजार है। वक्त बतागा कि किसान के इतने बढ़े आंदोलन के बाद जीत हासिल करेगा या केंद्र के आगे घुटने टेक देगा।
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