चाइना और पाकिस्तान के उड़ेंगे होश, इंडियन आर्मी को मिलने जा रहा है ऐसा खतरनाक हथियार

भारतीय सेना अब विश्व युद्ध-2 विंटेज डिजाइन वाले हैंड ग्रेनेड की जगह नए आधुनिक ग्रेनेड का उपयोग करेगी। रक्षा क्षेत्र में भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल को और प्रोत्साहन देते हुए रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना को 409 करोड़ रुपए की लागत से 10 लाख मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड्स की आपूर्ति के लिए मैसर्स इकोनॉमिक एक्सप्लोजिव लिमिटेड (ईईएल), (सोलर ग्रुप) नागपुर के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड को डीआरडीओ/टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लैबोरेटरीज (टीबीआरएल) की ओर से डिजाइन किया गया है। इसका निर्माण मैसर्स ईईएल, नागपुर की ओर से किया जा रहा है। ये उत्कृष्ट डिजाइन वाले ग्रेनेड हैं, जिन्हें आक्रामक और रक्षात्मक दोनों तरह की लड़ाई में उपयोग किया जा सकता है। मंत्रालय का कहना है कि यह डीआरडीओ रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में सार्वजनिक-निजी साझेदारी का प्रदर्शन करने वाली अग्रणी परियोजना है, अत्याधुनिक गोला बारूद प्रौद्योगिकियों में आत्म निर्भरता को सक्षम बनाती है और इसकी सामग्री 100 प्रतिशत स्वदेशी है।इसके साथ ही परिचालन (ऑपरेशनल) स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन एवं जवाबदेही के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने गुरुवार को 7,796.39 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर एक सुरक्षित और बेहतर संचार नेटवर्क के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि नया आर्मी स्टेटिक स्विचड कम्युनिकेशन नेटवर्क (एस्कॉन) भारतीय सेना की लंबे समय से लंबित मांग रही है। मंत्रालय ने कहा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आईटीआई द्वारा 7,796.39 करोड़ रुपये की लागत से इसे लागू किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि इसका कार्यान्वयन अनुबंध की तारीख से 36 महीने की अवधि के बाद सुनिश्चित हो जाएगा। इसके अलावा, लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ यह परियोजना भारतीय उद्योग को बढ़ावा देगी। यह प्रोजेक्ट मौजूदा अतुल्यकालिक ट्रांसफर मोड टेक्नोलॉजी को इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) और मल्टी प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग (एमपीएलएस) टेक्नोलॉजी में अपग्रेड करेगा। मंत्रालय ने कहा, ‘‘ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी), माइक्रोवेव रेडियो और सैटेलाइट का उपयोग संचार माध्यम के रूप में किया जाएगा।’’
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