भाजपा पर आरोप, सरकार के एक फैसले से गई 68 लोगों की जान, अब जमकर हुआ प्रदर्शन

त्रिपुरा सरकार की ओर से शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा के विरोध में नौकरी से निकाले गए सैकड़ों अनुबंधित शिक्षकों ने सिविल सचिवालय की ओर मार्च निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया। नौकरी से निकाले गए अनुबंधित शिक्षकों ने विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी की मांग की है। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों पर पानी की बौछारें करने के अलावा उन पर लाठीचार्ज भी किया। लाठीचार्ज में महिलाएं समेत कुल आठ शिक्षक घायल भी हो गए। करीब 100 से अधिक शिक्षकों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर सचिवालय के प्रमुख द्वार की ओर जाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के अलावा भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेताओं से वचन का पालन करते हुए 10323 शिक्षकों की नौकरी बचाने की गुहार लगाई है। प्रदर्शन कर रहे राजेश धर नामक एक शिक्षक ने कहा, मार्च में नौकरी से निकाले जाने के बाद पिछले छह महीनों के दौरान भयावह गरीबी और आर्थिक तंगी के कारण कम से कम 68 शिक्षकों की मौत हो चुकी है। हममें से कई लोगों ने बैंकों से कर्ज भी लिया और अब हम नयी नौकरी पाने के लिए युवाओं से मुकाबला नहीं कर सकते। सरकार ने मानवता के आधार पर हमारी मदद करने का आश्वासन दिया था।त्रिपुरा सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में सी और डी श्रेणी के 12 हजार रिक्त पदों को भरने के लिए एक नियुक्ति प्रक्रिया लागू करने की घोषणा की है।
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