कोरोना वायरस का एक और खतरनाक रूप आया सामने, इस तरह करता है पूरे शरीर पर अटैक

कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनियाभर में लगतार शोध हो रहे हैं। अमरीका समेत दुनिया के प्रमुख देशों में इस वायरस के संक्रमण के कारणों व पहचान को लेकर अध्ययन किए गए हैं। हाल ही जारी अध्ययन में पाया गया कि कोरोना वायरस सिर्फ सांस संबंधी ही नहीं, यह व्यक्ति के पूरे शरीर पर हमला करता है। कोरोना से संक्रमित 38 वर्षीय मरीज 10 दिनों पहले ठीक था। शुरु में इसको हल्के लक्षण दिखाई दिए। हल्की खांसी आ रही थी। घर से ही इलाज हो चल था। इसके बद कोरोनावायरस ने अचानक पूरे शरीर में अटैक करना शुरू कर दिया। उसके दोनों पैर सुन्न व ठंडे होने लगे। कमजोरी इतनी ज्यादा कि उसका चलना मुश्किल हो रहा था।रक्त के थक्के बननासामान्यत: युवा मरीजों में ऐसा देखने को कम मिलता है कि धमनियों में रक्त का थक्का बनने लगे। इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है जो जानलेवा हो जाता है। शरीर में मौजूद विशेष प्रकार के प्रोटीन के कारण खून जमता या रुकता है। इससे शरीर में हार्ट स्ट्रोक, हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही किडनी फेल होना, हार्ट में सूजन व प्रतिरक्षा संबंधी समस्याएं शुरू होती हैं। डॉ. वेंगरटर ने कहा कि यह आमतौर पर 38 वर्षीय मरीजों में नहीं होता है। कोरोना मरीजों की 20-50 प्रतिशत मौत थक्के बनने से होती है।मल्टी ऑर्गन फेल्योरयह वायरस इतना खतरनाक है कि मल्टी सिस्टम ऑर्गन फेल्योर का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में रोगी की सांस लेने की क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। रक्त के थक्के जमने से शरीर में यह कई अंगों की क्रिया को प्रभावित करता है।इसलिए त्वचा पर चकत्तेक्लीवलैंड पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. क्लेव्ड के अनुसार संक्रमितों के पैरों की उंगलियों में एक खास पैटर्न मिल रहा है। तलवों पर लाल चकत्ते जैसा है। यह त्वचा की प्रतिक्रिया या रक्त वाहिकाओं में थक्के के कारण होता है।बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावितबच्चों में प्रतिरक्षा प्रभाव से जुड़ा हुआ है। बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल की रुमेटोलॉजिस्ट डॉ. मैरी बेथ सोन ने कहा कि यह वायरस दिल को नुकसान पहुंचा सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्लेन बुडिक ने कहा, आपका प्रतिरक्षा तंत्र वायरस के कारण ओवररिएक्ट कर रहा है, क्योंकि वायरस शरीर में कई तरह के बदलाव लाता है। बोस्टन चिल्ड्रन पैनल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जेन न्यूबर्गर ने कहा बच्चों के शरीर में एंटीबॉडी तीव्र प्रतिक्रिया देता है, इसलिए उनमें दिक्कत ज्यादा होती है।
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