दुनिया का से बड़ा डिटेंशन बनेगा अस्पताल! एकसाथ रह सकेंगे 10 हजारी मरीज

असम के गोलपाड़ा में स्थित डिटेंशन सेंटर को अब कोरोना वायरस के मरीजों के लिए अस्पताल में बदला जा सकता है। गौरतलब इस डिटेंशन सेटर को विदेशी घुसपैठियों को रखने के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन इस का इस्तेमाल कोरोना वायरस के मरीजों के लिए अस्पताल के रूप में किया जा सकता है। संगठन के राज्य समन्वयक जमसेर अली ने कहा कि निर्माणाधीन गोलपाड़ा निरोध केंद्र में लगभग 10,000 लोगों का इलाज हो सकता है। इसे अस्पताल में बदल देना चाहिए।वर्तमान में असम के जेल परिसरों में छह निरोध केंद्र हैं जहां विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित व्यक्तियों को रखा जाता है।गोलपाड़ा जिले के माटिया में जेल परिसर के बाहर एक और निरोध केंद्र स्थापित किया जा रहा है।अली ने कहा, “असम सरकार घनी आबादी वाली जगह से दूर पृथक केंद्र बनाने के लिए जगह ढूंढ रही है। वायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए यह जरूरी है। इस सुविधा को कोविड-19 के मरीजों के लिए अस्पताल में बदल कर समय, धन और ऊर्जा की बचत होगी क्योंकि परिसर की दीवार और कमरे लगभग बनकर तैयार हैं। इसलिए हम सरकार से आग्रह करते हैं कि निर्माणाधीन गोलपाड़ा निरोध केंद्र को तत्काल कोविड-19 के मरीजों के लिए पृथक सेवा केंद्र और अस्पताल में बदल दिया जाए।”माटिया में निरोध केंद्र नहीं बनाने के अपने तर्क को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा‘‘अगर हम समय-समय पर संसद और असम विधानसभा में प्रस्तुत किए गए सरकारी दस्तावेजों को देखें तो पता चलता है कि असम के छह निरोध केंद्रों में रहने वाले लगभग 98 प्रतिशत लोगों का विदेशों से कोई संबंध नहीं है।”उन्होंने दावा किया कि असम के इन केंद्रों में अब तक मरे 29 लोगों के अवशेषों को विदेश में नहीं भेजा जा सका बल्कि उन्हें भारत में रह रहे उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया और उनका अंतिम संस्कार भी इसी धरती पर किया गया।
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