MP घमासानः सुप्रीम कोर्ट में होगी आज सुनवाई, फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार रहे कमलनाथ सरकार

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के तारे गर्दिश में है। फ्लोर टेस्ट के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई है। आपकी जानकारी के लिए राज्यपाल के निर्देश के बावजूद बजट सत्र के पहले दिन फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने से नाराज भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट पर दस्तक दी। फ्लोर टेस्ट की सभा 26 मार्च तक स्थिगत करने से नाराज भाजपाईयों ने राजभवन में अपने 106 विधायकों की परेड कराई। बता दें कि राज्यपाल ने पत्र लिखा जिसमें कहा कि आपने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के जिस निर्णय का जिक्र किया है, वह वर्तमान परिस्थितियों में लागू नहीं होता है। भाजपा ने कहा कि फ्लोर टेस्ट न कराने के जो कारण दिए हैं वे भी आधारहीन और अर्थहीन हैं। राज्यपाल के बुलावे पर मिले कमलनाथ ने आश्वस्त किया था कि फ्लोर टेस्ट को लेकर वह स्पीकर से बात करेंगे, लेकिन उन्होंने सत्र शुरू होने के कुछ देर पहले ही राज्यपाल को छह पेज का पत्र भेजकर बेंगलुर में बंदी विधायकों का हवाला देते हुए फ्लोर टेस्ट के औचित्य पर सवाल खड़े कर दिए। बता दें कि सोमवार को बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से हुई और एक ही मिनट अपना अभिभाषण खत्म किया। उन्होंने सभी को सलाह दी कि संविधान के निर्देशों-नियमों का परंपराओं के अनुरूप पालन करें। और जैसे ही स्पीकर एनपी प्रजापति आसंदी पर आकर बैठे और चंद मिनट कार्यवाही चलाने के बाद कोरोना वायरस का हवाला देते हुए सदन की बैठक 26 मार्च तक स्थगित करने की घोषणा कर दी। जिससे नाराज होकर भाजपा ने हंगामा कर दिया और कोर्ट में याचिका दर्ज कराई। इसी के साथ शिवराज बोले कि रणछोड़दास है कमलनाथ सरकार। और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार मैदान छोड़कर भाग गई, तंज कसते हुए ये भी बोला कि सरकार अल्पमत में है बहुमत खो चुकी है। कोरोना वायरस का बहाना कर फ्लोर टेस्ट टाल दिया गया, लेकिन कमलनाथ सरकार को अब कोरोना भी नहीं बचा सकता है।
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