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जब सैनिकों की लाशें बनीं केमिकल बम तब फैला था मौत का बैक्टीरिया


दुनिया में कई तरह की महामारी आई है लेकिन कोरोना वायरस जितनी खतरनाक आज तक नहीं हुई। ये महामारी अब तक की सबसे खतरनाक महामारी मानी जा रही है। इस तरह की महामारी या तो साल 1337 आई थी या फिर अभी आई है। साल 1337 की बात करते हैं तो एक व्यक्ति कटलक सिल्क रूट के सहारे अपना माल बेचक घर लौटा था। फिर अचानक बीमार पड़ा। उसकी पत्नी ने देखा कुछ दिनों बाद कटलक के शरीर पर कई फोड़े निकल आए हैं जो ये हरे रंग के थे। 10 दिनों के भीतर ही कटलक की मौत हो गई। इसके कुछ ही दिनों बाद उसकी पत्नी की भी इसी तरह मौत हो गई। यह दुनिया में ब्यूबोनिक प्लेग की शुरुआत भर थी। इसी तरह की बीमारी से ग्रसित होकर उस साल मंगोलिया में चार लोगों की मौत हुई। फिर अचानक से दूसरी साल 200 लोग मारे गए। और उसके बाद इटली के कारोबारियों ने प्लेग के बैक्टीरिया को पूरी दुनिया में फैला दिया। देखते ही देखते यूरोप की एक तिहाई आबादी काल के गाल में समा गई। जानकारी के लिए बता दें कि इमर्जिंग इनफेक्शियस डिजीज के नाम से नवंबर 2002 में प्रकाशित जर्नल के मुताबिक पांच करोड़ लोगों को प्लेग ने अपना शिकार बनाया। शोध के बाद पता चला कि ब्यूबोनिक प्लेग यर्सीनिया पिस्टा नाम के बैक्टीरिया से फैला था। ये पिस्सुओं के काटने से होता है और चूहे इसके वाहक हैं। बता दें कि चूहे की जोड़ी साल में दो हजार चूहे पैदा करती है। एक चूहा प्लेग फैलाने वाले आठ पिस्सुओं को साथ रखता है। इतिहास की बात करें तो उस समय ब्लैक सी यानी काला सागर का बंदरगाह काफा सेंट्रल एशिया से यूरोप का द्वार माना जाता था। यहां पर इतालवी कारोबारियों की तूती बोलती थी। उसी समय चंगेच खान का वंशज जानी बेग मंगोलियाई साम्राज्य को फैलाने के इरादे से काफा पहुंचा। प्लेग ने अपनी इतना प्रकोप फैलाया कि जानी बेग की सेना को पस्त कर दिया। उसके हजारों सैनिक इसके शिकार हो गए और जानी बेग ने अपने ही सैनिकों की लाशों को हथियार बना डाला जिससे इतिहास थर्रा उठता है। आपको जानकार हैरान होगी की उसने गुलेल की तरह के विशालकाय लॉन्चर बनाए। उसके जरिए काफा की दीवार के दूसरी ओर उसे प्लेग से मरे सैनिकों को फेंकना शुरू किया। बता दें कि मिलिट्री हिस्ट्री में इसे पहला जैविक युद्ध कहा जाता है। देखते ही देखते पूरा काफा में लाशों के कारण प्लेग का बैक्टीरिया तेजी से फैलने लगा। इटालियन गैब्रिएल द मुस्सी ने काफा में मौत का मंजर देखा था। उसके नोट्स को काफा की कहानी का इकलौता जीता जागता प्रमाण माना जाता है। ब्यूबोनिक प्लेग के बाद अब तक के 700 साल में दुनिया काफी तरक्की कर चुकी है। इस बीच न जाने कितनी बार सार्स, ई-बोला, चिकन पॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों ने खौफ फैलाया लेकिन जल्दी ही इनसे निपट लिया गया। पर कोरोना वायरस ( Covid-19)के फैलने की गति ने अभी तक काबू नहीं पाया गया है और ये 70 से ज्याद देशों में ये फैल चुका है। 4500 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। सबसे कारगर इलाज भी वही है जिसने 700 साल पहले अमेरिका को बचाया था। संक्रमित लोगों से अलग रहें।

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