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Dance Plus 5: गुजरात के मोनार्क त्रिवेदी पहुंचे असम के अमारगांव, जहां रहते हैं बौने लोग


स्टार प्लस (Star Plus) पर प्रसारित होने वाले डांसिंग रियलिटी शो डांस प्लस 5 (Dance Plus 5) में मोनार्क त्रिवेदी इस हफ्ते असम के अमारगांव पहुंचे। बता दें कि जब मोनार्क कैप्टन सुरेश से मिले थे तब उन्होंने असम के अमारगांव जाने की इच्छा जाहिर की थी। फाइनली इस हफ्ते कैप्टन सुरेश ने उन्हें अमारगांव भेज दिया। बता दें कि मोनार्क की हाइट कम है। इसलिए वे अमारगांव, असम एक बार जाना चाहते थे और अपने जैसे दिखने वाले लोगों से मिलना चाहते थे।महज 4 फीट के मोनार्क त्रिवेदी अपनी धमाकेदार परफॉर्मेंस के जरिए हमेशा डांस प्लस-5 के जजेस रेमो डिसूजा, धर्मेंद्र येलांडे, करिश्मा चवन, पुनीत पाठक, सुरेश मुकुंद को चौंकाते रहते हैं। मोनार्क त्रिवेदी ने हाल ही में डांस प्लस में एक परफॉर्मेंस दी। जिसके जरिए मोनार्क ने अपनी रियल लाइफ स्टोरी दर्शकों के सामने लाई। डांस प्लस-5 के कंटेस्टेंट मोनार्क त्रिवेदी ने परफॉर्मेंस से जरिए बताया कि जन्म के दौरान ही डॉक्टर्स ने बता दिया था कि वो बौने हैं और बाकी बच्चों की तरह उनकी हाइट नहीं बढ़ेगी। गुजराज के जूनागढ़ से आए मोनार्क त्रिवेदी बहुत ही बेहतरीन डांसर हैं। शाहरुख खान, सलमान खान, अजय देवगन, काजोल, दीपिका पादुकोण, नोरा फतेही सहित कई बॉलीवुड स्टार्स उनके डांस के फैन हैं। शो में कई स्टार्स ना सिर्फ उनकी खुलकर तारीफ कर चुके हैं बल्कि मोनार्क के साथ डांस करते भी नजर आए हैं। 20 साल के हो चुके मोनार्क ने महज 11 साल की उम्र में ही डांस सीखना शुरू कर दिया था। क्यों खास है अमार गांवभारत के असम में बौने लोगों का अनोखा गांव बसा है। बौनों के गांव को अमार गांव यानी हमारा गांव भी कहा जाता है। बचपन में आपने लिलिपुट आइलैंड को किताबों में तो पढ़ा ही होगा। भारत-भूटान सीमा से कोई तीन-चार किलोमीटर पहले अमार नाम के इस गांव में 70 लोग रहते हैं। दूसरे गांवों के लोग इसे बौनों का गांव कहते हैं और गांव को बसाने वाले पबित्र राभा को बौनों का सरदार माना जाता है। अमार में किसी भी शख्स की ऊंचाई साढ़े तीन फीट से ज्यादा नहीं है। यहां कोई अपनी इच्छा से रहने आया है तो किसी को उसी के परिवार वाले यहां छोड़कर गए हैं।अमार गांव के लोगों का कद भले ही छोटा हो लेकिन इनकी सोच और इरादे पहाड़ जितने ऊंचे हैं। यहां के ये बौने लोग दिन में खेतीबाड़ी करते हैं और शाम होते ही रंगमंच के कलाकार के तौर पर नजर आने लगते हैं और शुरू हो जाता है नाटक का दौर। ये गांव दुनिया में होते हुए भी दुनिया से अलग है। आसपास के लोग जब यहां आते हैं तो छोटे कद की इस नाटक मंडली के नाटक देखकर इनकी जमकर तारीफ भी करते हैं।

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