सरकार ने इमामों और मुस्लिम टीचर्स पर लगाया बैन, बताई ये चौंकाने वाली वजह

सरकार ने इमामों और मुस्लिम टीचर्स पर रोक लगा दी है जिसके पीछे का चौंकाने वाला कारण बताया है। सरकार ने यह रोक लगाने के पीछे कारण बताया है कि ये लोग कट्टरता और नफरत फैलाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि सरकार ने यह भी आदेश जारी किया है कि देश में मौजूद इमामों और मुस्लिम टीचर्स को राष्ट्रभाष भी सीखना जरूरी है और इस कानून का उन्हें सख्ती से पालन करना ही होगा।दरअसल इमामों और मुस्लिम टीचर्स पर यह रोक फ्रांस की सरकार ने लगाई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के मुताबिक, सरकार ने यह फैसला कट्टरपंथ और अलगाववाद रोकने के लिए किया है। राष्ट्रपति ने बुधवार को ये भी साफ कर दिया कि फ्रांस में जो इमाम मौजूद हैं उन्हें स्थानीय भाषा यानी फ्रेंच सीखना जरूरी होगा। उन्होंने आगाह किया कि फ्रांस में रहने वालों को कानून का सख्ती से पालन करना होगा। उनके देश में विदेशी इमाम भी नहीं आ सकेंगे।बताया गया है कि 2019 में फ्रांस की कुल जनसंख्या करीब 6.7 करोड़ थी जिनमें से करीब 65 लाख मुस्लिम हैं। फ्रांस का 4 देशों से समझौता है। इसके मुताबिक, ये देश अपने इमाम, इस्लामिक शिक्षक और विद्वान फ्रांस भेज सकते हैं। यह समझौता 2020 के बाद खत्म हो जाएगा। राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में पूर्वी शहर मुलहाउस का दौरा किया था जहां पर मुस्लिमों की बड़ी तादाद है। राष्ट्रपति ने कहा है कि हम विदेशी इमामों और मुस्लिम टीचर्स के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। इनकी वजह से देश में कट्टरपंथ और अलगाववाद का खतरा है। इसके अलावा विदेशी दखलंदाजी भी नजर आती है। दिक्कत तब होती है, जब मजहब के नाम पर कुछ लोग खुद को अलग समझने लगते हैं और देश के कानून का सम्मान नहीं करते।फ्रांस ने 1977 में 4 देशों से एक समझौता किया था जिसके मुताबिक अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को और तुर्की फ्रांस में इमाम यहां भेज सकते हैं। समझौते में यह भी शर्त थी कि फ्रांस में अधिकारी इन इमामों या टीचर्स के काम की निगरानी नहीं करेंगे। इस वजह से हर साल 300 इमाम फ्रांस आते थे। ये करीब 80 हजार छात्रों को शिक्षा देते थे। लेकिन अब 2020 के बाद यह सिलसिला थम जाएगा। सरकार ने फ्रेंच मुस्लिम काउंसिल को आदेश दिया है कि वह इमामों को स्थानीय भाषा सिखाए और किसी पर इस्लामिक विचार न थोपे जाएं। मैक्रों ने यह भी कहा कि फ्रांस सरकार के पास अब ज्यादा अधिकार हैं। हम इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ हैं। बच्चों की शिक्षा, मस्जिदों को मिलने वाली आर्थिक मदद और इमामों की ट्रेनिंग पर ध्यान देंगे। इससे विदेशी प्रभाव कम होगा। हम सुनिश्चित करना चाहेंगे कि यहां रहने वाला हर व्यक्ति फ्रांस के कानून का पालन और सम्मान करे। फ्रांस में तुर्की का कानून नहीं चल सकता।अब हम twitter पर भी उपलब्ध हैं। ताजा एवं बेहतरीन खबरों के लिए Follow करें हमारा पेज : https://twitter.com/dailynews360
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