मकर संक्रांति पर्व दो दिन, आज पतंगोत्सव और कल दान-पुण्य का दिन

मंगलवार को मध्य रात्रि बाद तुला लग्न में मकर संक्रांति का प्रवेश होगा। शहर के मंदिरों और प्रमुख तीर्थों में बुधवार को संक्रांति मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि मंगलवार मध्य रात्रि बाद रात 2.08 बजे से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। जिसका पुण्यकाल बुधवार सुबह सूर्योदय के बाद 7.21 से शाम 5.50 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण की ओर बढऩे लग जाएगा जिससे सूर्योदय के समय में कमी और सूर्यास्त में देरी होगी। वहीं बुधवार मलमास खत्म होने से शुभ कार्य भी शुरू होंगे। फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। इस बार संक्रांति गदर्भ पर सवार होकर धोबी के घर प्रवेश करेगी जिससे आगामी वर्ष में नदी, तालाबों में जल की आपूर्ति ओर बढ़ेगी। संक्रांति लगने से इसका नक्षत्र नाम घोरा रहेगा जो कि अल्पसंख्यक, आदिवासी वर्ग और असहाय लोगों के उत्थान के लिए लाभदायी रहेगी। ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि संक्रांति काल, संध्याकाल व उसके बाद होने से शास्त्रों के मुताबिक उदय काल में पुण्यकाल श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए 15 जनवरी को ही सूर्योदय के बाद दान पुण्य करना श्रेष्ठ रहेगा। तुला लग्न में मकर राशि में सूर्य प्रवेश से शहर के विकास के साथ, मान-सम्मान में वृद्धि होगी। वहीं महिलाएं 14 वस्तुएं कल्प कर दान करेगी। गलता तीर्थ के महंत स्वामी अवधेशाचार्य ने बताया कि संक्रांति के पुण्य काल में काले तिल, इससे बनने वाले व्यंजन, जागरण, तीर्थों में स्नान करना फलदायी है।किस राशि के लोग क्या दान करेंमेष, वृश्चिक- गुड़ और तिल के लड्डू, लाल ऊनी वस्त्रवृष, तुला- सफेद तिल के चीनी से बने लड्डू, सफेद शॉल व पंचांगमिथुन, कन्या -हरे रंग के ऊनी वस्त्र, फीणी की मिठाईसिंह -सफेद ऊनी वस्त्र, सफेद तिल, चीनी के लड्डूकर्क- छाता, छड़ी, खाने के तरल पदार्थधनु, मीन-धार्मिक पुस्तक, पंचांग व पीले वस्त्रकुंभ-मकर-काले तिल से बने लड्डू, काले कंबल, ऊनी वस्त्र
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