किसानों पर मेहरबान हुई सरकार, इस काम के लिए दे रही 10 लाख रूपए, ऐसे उठाएं पैसा

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार एकबार फिर से किसानों पर मेहरबान हुई है। सरकार किसानों को फल और सब्जियों के प्रसंस्करण की उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी देने जा रही है। देश के किसानों को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की ओर से 2 हजार करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजना के तहत यह सहायता मिलेगी। बताया गया है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया है जिसके बाद इसें कैबिनेट की अनुमति मिलेगी और फिर लागू किया जाएगा।बताया गया है कि संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। इस कदम से गावों में छोटे उद्योगों को आधुनिक बनाने और फूड प्रोसेसिंग में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।इस योजना के तहत यदि कोई इकाई का मालिक किसान कर्ज लेता है तो ब्याज सब्सिडी के अलावा किसी यूनिट को योजना के तहत मिलने वाली राशि की ऊपरी सीमा 10 लाख रुपये होगी। इसमें महिलाओं और उद्यमियों की ओर से चलाए जा रहे प्रॉजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। फर्स्ट-टाइम आंट्रप्रन्योर को आसानी से कर्ज मिल जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए हम उन्हें बैंकों से भी जोड़ा जाएगा। अनाजों और मसालों जैसे कच्चे सामान के निर्यात के जरिए वैल्यू चेन में प्रोसेसिंग का लेवल बढ़ाने की योजना इससे देश को ज्यादा विदेशी मुद्रा मिलेगी और किसानों को अच्छा रिटर्न मिल सकेगा।आपको बता दें कि भारत दुनियाभर में फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि उत्पादन के 10 प्रतिशत से कम की ही प्रोसेसिंग हो पाती है और जल्द खराब होने वाले खाद्य पदार्थ बड़ी मात्रा में बर्बाद हो जाते हैं। सरकार पिछले कुछ सालों में ऐसे खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश लाने पर ध्यान दे रही है।केंद्र सरकार की इस स्कीम से किसानों, कुटीर उद्योगों, किसान संगठनों सहित अन्य लोगों को तरक्की करने का मौका मिलेगा, साथ ही देसी और वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। योजना का मकसद ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना और किसानों की आय दोगुनी करना है। अधिकारियों के मुताबिक छोटे और मझोले उद्योगों को पूंजी उपलब्ध कराने और उन्हें बढ़ावा देने से हम फार्म-टू-मार्केट लिंकेज बनाने में मदद करेंगे। इससे ग्रामीण भारत में फूड प्रोसेसिंग कपैसिटी बढ़ाने, टेक्नॉलजी अपग्रेड करने और फूड प्रॉडक्ट्स की नई रेंज लाने में भी मदद मिलेगी।
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