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करवा चौथ पर बन रहा है कई सालों बाद ऐसा विशेष संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि


कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस बार करवा चौथ का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ-साथ सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेगा। ऐसा संयोग कई सालों बाद पड़ रहा है। चतुर्थी तिथि 17 अक्टूबर सुबह 06 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी जो 18 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक चलेगी| जिसके कारण उपवास का समय करीब 13 घंटे होगा।इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम को चांद के दर्शन करके अर्ध्य देती हैं। जिसके बाद ही वह अपना उपवास तोड़ती हैं। अपने पति की लंबी उम्र के लिये करवाचौथ का व्रत किया जाता है। 17 अक्टूबर को चन्द्रोदय 06 बजकर 41 मिनट पर होगा ।करवा चौथ के व्रत में भगवान शंकर, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्र देव की पूजा-अर्चना होती है। एक तांबे या मिट्टी के बरतन में चावल, उड़द की दाल, सिंदूर, चूड़ी, शीशा, कंघी, लाल रिबन और रुपए रखकर किसी बड़ी सुहागिन महिला या अपनी सास के पांव छूकर उन्हें भेंट करें। करवा चौथ की पूजा के लिए एक स्‍टील या ब्रास की थाली का इस्तेमाल करें। इसमें रूई को तेल में डुबाकर चिन्ह बनाएं। इसी थाली में चावल और कुमकुम अलग-अलग रख लें। थाली में ही पूजन के लिए दीपक, धूपबत्ती सहित अन्य सामान रखें। मिट्टी के करवों में पानी भरकर रख लें। इसके अलावा चांद को देखने के लिए एक छलनी भी रख लें। पूजा कर कथा सुनें और जब चांद पूरी तरह से दिख जाए तो उसे छलनी से देखकर अर्घ्य देकर आरती उतारें। इसके तुरंत बाद अपने पति को उसी छलनी से देखें।

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