पशुबलि के समर्थन में खड़ी हुई BJP सरकार, Supreme Court में करेगी अपील

त्रिपुरा सरकार ने मंदिरों में पशुओं की बलि पर रोक के उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है। कानून मंत्री रामरत्न लाल नाथ ने सोमवार को कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील और विवादित है और इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है, अत: इसे उच्चतम न्यायालय में ले जाना बेहतर होगा। नाथ ने कहा , हम लोग सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी)दायर करेंगे। जानवरों के प्रति क्रूरता रोकथाम अधिनियम 1960 में भी धर्मिक कारणों की वजह से पशुओं की बलि की अनुमति दी गयी है। इसी तरह के मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार का मामला शीर्ष न्यायालय में लंबित है और सरकार उच्चतम न्यायालय से दिशानिर्देश चाहती है। उन्होंने कहा कि जबतक इस मामले में शीर्ष न्यायालय में एसएलपी नहीं दर्ज हो जाती है तबतक त्रिपुरा उच्च न्यायालय का फैसला लागू रहेगा और जानवरों की बलि पर रोक रहेगी। उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा उच्चन्यायालय ने राज्य के सभी मंदिरों में पशुओं या पक्षियों की बलि पर शुक्रवार को रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जानवरों को भी जीवन का मौलिक अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और जस्टिस अरिंदम लोध की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था जिसमें कहा गया था कि किसी को भी राज्य के अंदर किसी भी मंदिर के प्रांगण में पशु और पक्षी की बलि देने की इजाजत नहीं होगी। पीठ ने सभी जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को इस आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को दो प्रमुख मंदिरों-देवी त्रिपुरेश्वरी मंदिर और चतुरदास देवता मंदिर में तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगवाने का आदेश दिया। इन दोनों मंदिरों में बड़ी संख्या में पशुओं की बलि दी जाती है।
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