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प्रणव मुखर्जी, भूपेन हजारिका, नानाजी देशमुख भारत रत्न से अलंकृत, जानिए कब से दिया जा रहा है भारत रत्न


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को आज यहां देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया। उनके अलावा समाजसेवी नानाजी देशमुख और संगीतकार एवं गीतकार भूपेन हजारिका को मरणोपरांत इस अलंकरण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में एक आकर्षक समारोह में कोविंद ने प्रशस्ति पत्र तथा अलंकरण पदक प्रदान किये। सत्तरवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी को इन तीनों विभूतियों को भारत रत्न से विभूषित करने की घोषणा की गयी थी। करीब 10 मिनट तक चले इस समारोह में सबसे पहले नानाजी देशमुख की ओर से दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेंद्र जीत सिंह ने प्रशस्ति पत्र और अलंकरण पदक ग्रहण किया। इसके बाद हजारिका की ओर से उनके बेटे तेज हजारिका ने प्रशस्ति पत्र और अलंकरण पदक ग्रहण किया। मुखर्जी का नाम पुकारे जाने पर उन्होंने सम्मान ग्रहण करने के लिए जाते समय अगली पंक्ति बैठे उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य गणमान्य अतिथियों का अभिवादन किया। कोविंद ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया और अंलकरण पदक पहनाया। इसके बाद मुखर्जी ने एक-एक कर अगली पंक्ति में बैठे नायडू, मोदी, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व कैबिनेट मंत्री मुरली मनोहर जोशी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से एक-एक कर हाथ मिलाया। समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, खेल मंत्री किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, थल सेना प्रमुख जनरल विपन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मबीर सिंह और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत तथा लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी वहां उपस्थित थे। 1954 में की गयी भारत रत्न सम्मान की शुरुआत भारत रत्न सम्मान की शुरुआत 1954 में की गयी थी। उस वर्ष चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, देश के पहले उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. सी. वेंकटरमण को पुरस्कार दिया गया था। अब तक 48 लोगों को यह सम्मान दिया गया है। मुखर्जी भारत रत्न से अलंकृत किए गये देश के ऐसे छठे व्यक्ति हैं जो राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर चुके हैं। इनमें से डॉ. राधाकृष्णन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनने से पहले ही यह सम्मान मिला था। मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के किरनाहर शहर के एक छोटे से गांव मिराती में 11 दिसंबर, 1935 को हुआ था। उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी क्षेत्र के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे और आजादी की लड़ाई में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के कारण वह 10 वर्षों से ज्यादा समय तक जेलों में कैद रहे। तत्कालीन कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबंधित सूरी विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद मुखर्जी ने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.) तथा क़ानून की पढाई की। उन्होंने लंबे समय तक शिक्षक, एक वकील एवं पत्रकार के तौर पर काम किया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1969 में हुई, जब वह पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गये। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इनकी योग्यता से प्रभावित होकर मात्र 35 वर्ष की अवस्था में उन्हें 1969 में कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्य सभा का सदस्य बनाया। उसके बाद वह 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए। मुखर्जी लोकसभा के लिए पहली बार पश्चिम बंगाल के जंगीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 2004 में चुने गए थे और इसी क्षेत्र से दुबारा 2009 में भी लोकसभा के लिए चुने गए। वह लंबे समय तक देश के वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष आदि पदों पर रहे। उन्हें जुलाई 2012 में देश का 13वां राष्ट्रपति चुना गया। मुखर्जी की पत्नी शुभ्रा मुखर्जी का निधन हो गया है। उनके परिवार में पुत्र अभिजीत मुखर्जी और पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी हैं। नानाजी देशमुख ने ठुकरा दिया था मन्त्री पदनानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को और निधन 27 फरवरी 2010 में हुआ था। उनका वास्तविक नाम चंडिकादास अमृतराव देशमुख था। वह भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेता भी रहे। वर्ष 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो उन्हें मोरारजी देसाई मन्त्रिमण्डल में शामिल किया जा रहा था लेकिन उन्होंने यह कहकर कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग सरकार से बाहर रहकर समाज सेवा का कार्य करें, मन्त्री पद ठुकरा दिया था। वह जीवन पर्यन्त दीनदयाल शोध संस्थान के अन्तर्गत चलने वाले विविध प्रकल्पों के विस्तार के लिए कार्य करते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया था। वाजपेयी के कार्यकाल में ही केन्द्र सरकार ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य एवं ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये पद्म विभूषण भी प्रदान किया था। उन्होंने चित्रकूट के ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना की और स्वावलंबन पर आधारित ग्राम स्वराज का अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी भूपेन हजारिका भूपेन हजारिका बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वह असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी थे। वह ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने गीत खुद लिखते थे, उन्हें संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्हें दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम सांस्कृतिक दूतों में से एक माना गया। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया। उन्होंने अपनी मातृभाषा असमिया के अलावा हिंदी और बांग्ला समेत कई भारतीय भाषाओं में गाने गाये। उनका जन्म असम के तिनसुकिया जिले के सदिया में हुआ था। हजारिका ने 1946 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम ए किया। वह इसके बाद पढ़ाई के लिए विदेश चले गये। न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। उन्हें 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें 2009 में असोम रत्न और उसी साल संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड और 2011 में पद्म भूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका निधन पांच नवंबर 2011 को हुआ था।

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