Saikhom Mirabai Chanu: ये मीराबाई भजन नहीं गाती, उठाकर पछाड़ देती है

125 करोड़ हिंदूस्तानियों की उम्मीदों के भार पर खरा उतरना इतना आसान नहीं होता है लेकिन विश्व चैम्पियन मीराबाई चानू ने ये कमाल कर दिखाया है। जी हां मीराबाई ने महिलाओं के 49 किलो वर्ग में 191 किलो (84 प्लस 107) का वजन उठा कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। अब यहां से मिले अंक 2020 टोक्यो ओलंपिक की अंतिम रैंकिंग में काफी मददगार साबित होंगे, लेकिन कायमाबी के जिस शिखर पर वो आज पहुंची हैं उसके पीछे उन्होंने कठियनाईयों की कई सीढ़ियां पार की हैं।बात उन दिनों की है जब कुंजरानी देवी की गांव में बड़ी चर्चा थी। दरअसल कुंजरानी देवी भी मणिपुर की ही रहने वाली हैं। मीराबाई चानू का बचपन उनके किस्से सुनते हुए ही बीता है। या यूं कहें उनकी इस सफलता के पीछे कुंजरानी की जीत की कहानी है। उनका कहना है कि कुंजरानी देवी की कहानी से वो बहुत प्रेरित हुई और उन्होंने भी वेट लिफ्टिंग में ही कुछ कर गुजरने की ठान ली। फिर यही से शुरू हुआ उनकी ट्रेनिंग का सफर लेकिन ये सफर इतना भी आसान नहीं था। आपको बता दें कि मणिपुर के एक छोटे से गांव की रहने वाली मीरा गांव में ट्रेनिंग सेंटर न होने की वजह से 50 से 60 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग के लिए जाया करती थी।वक्त था 2011 का जब उन्होेंने साउथ एशियन जूनियर गेम में गोल्ड मेडल जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की इसके बाद वो किसी की पहचान की मोहताज नहीं रहीं। फिर क्या था खेल कोटे से उन्हें रेलवे में नौकरी भी मिल गई और एक के बाद एक कई सारे खिताब उन्होंने अपने नाम किए फिर चाहे 2013 में सर्वश्रेष्ठ वेटलिफ्टर का खिताब हो या 2014 में ब्रिटेन के ग्लास्कोे शहर में आयोजित कामन वेल्थ गेम में सिल्वर मेडल। इन उपलब्धियों के बाद उनके हौसले और बुलंद हो गए। फिर बात आई रियो ओलंपिक की लेकिन यहां उन्हें बिना मेडल लिए ही वापस लौटना पड़ा। ये वो दौर था जब उनकी कामयाबी पर कई सवाल उठे लेकिन उस वक्त उन्होंने चुप रहना ही ठीक समझा और फिर उस हार का जवाब 2017 में विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल करके दिया।साल 2017 में वर्ल्ड वेट लिफ्टिंग में उन्होंने 48 किलो ग्राम केटेग्री में अपने वजन से 4 किलो ज्यादा यानि कि 194 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता साथ ही ग्लाज्गो कामन वेल्थ में सिल्वर मेडल भी। मणिपुर के एक छोटे से गांव में सुविधाओं के अभाव में पली-बढ़ी मीरा ने सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। हार कर उठना हर किसी के बस की बात नहीं और उठकर आसमान छूं जाना सिर्फ किस्मत का खेल नहीं, उसके लिए चाहिए हौसला और मीरा बाई चानू जैसी ताकत।
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