नम आंखों से मुख्यमंत्री ने दी इस दिग्गज नेता को अंतिम विदाई, जिससे कभी जीत नहीं पाई कांग्रेस

मेघालय विधानसभा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. डोनकुपर रॉय का अंतिम संस्कार बुधवार को राज्य के शेल्ला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उनके पैतृक गांव जाटप में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम संस्कार से पहले डॉ. रॉय के पार्थिव शरीर को राष्ट्र-ध्वज के साथ लपेटा गया और राज्य के गणमान्य लोगों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान पुलिस ने सोहरा स्टेडियम में बंदूकों की सलामी भी दी। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने डॉ रॉय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य के लिए उनके योगदान को याद किया। रॉय राज्य में सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाले मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस में मुख्य सहयोगी दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीपी) के अध्यक्ष भी थे। संगमा ने कहा, मैंने 2 मार्च 2016 को मेरे पिता (पूर्व लोकसभा अध्यक्ष अध्यक्ष पी ए संगमा) को खो दिया। मैं आज महसूस कर रहा हूं कि मैंने फिर से अपने पिता को खो दिया। रॉय सिर्फ एक नेता ही नहीं बल्कि हम में से प्रत्येक के लिए पिता जैसे थे। एक स्पीकर के रूप में उन्होंने सर्वोत्तम तरीके से विधानसभा को चलाया। वह हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते थे कि विधानसभा में संतुलन बना रहे। वह विपक्ष का सम्मान करते थे और सत्ता पक्ष को जवाब देने का अवसर देते थे। रविवार को हुआ था निधनमेघालय विधानसभा के अध्यक्ष दोनकुपर रॉय का रविवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वह 65 वर्ष के थे। राय को पेट की जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए 18 जुलाई को दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरूग्राम में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने रविवार को दोपहर बाद दो बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली। राय युनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी(यूडीपी) के अध्यक्ष थे। वह मार्च 2018 में मेघालय विधानसभा के अध्यक्ष चुने गये थे।लगातार 7वीं बार दर्ज की थी जीतदोनकुपर रॉय 2018 में लगातार 7वीं बार जीत दर्ज की थी। रॉय यूडीपी के टिकट पर पांच बार और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दो बार जीत दर्ज की थी। रॉय 2008 से 2009 तक मेघालय के मुख्यमंत्री भी रहे थे। मेघालय विधानसभा की शेल्ला सीट की तो इस सीट पर कांग्रेस कभी जीत नहीं पाई। इस सीट से दोनकुपर रॉय ने 2018 के विधानसभा चुनाव में लगातार 7वीं बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने अबतक यूडीपी के टिकट पर 5 बार और निर्दलीय दो बार जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव में इस सीट पर उन्होंने पीडीएफ के लेस्टन वन्सवेट को 370 वोटों से हराया था। रॉय को 8280 और वन्सवेट को 7910 वोट मिले थे। इस सीट से रॉय 1988 से 2018 तक 7 विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी।एक साल के लिए बने थे मुख्यमंत्रीरॉय यूडीपी की सरकार में 365 दिनों के लिए 19 मार्च 2008 से 18 मार्च 2009 तक मेघालय के 10वें मुख्यमंत्री भी रहे। साल 2013 में यूडीपी के रॉय ने निर्दलीय उम्मीदवार लिस्टों वंसवेत को 355 वोटों से हराया था। रॉय को 5940 और वंसवेत को 5585 वोट मिले थे। साल 2008 में रॉय ने कांग्रेस उम्मीदवार वंसवेत को 939 वोटों से हराया था। रॉय को 4238 और वंसवेत को 3299 वोट मिले थे। इससे पहले रॉय ने 2003 में केएचएनएएम के पिंडैपब्रोथ्मू सेबों को 222 वोटों से हराया था। रॉय को 3145 और सेबों को 2923 वोट मिले थे।1998 में दोनकुपर रॉय ने जी. ग्रांडेर्सन सीईएमलीह को 811 वोटों से हराया था। रॉय को 3773 और सीईएमलीह को 2962 वोट मिले थे। साल 1993 में भी रॉय ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए सीईएमलीह को 742 वोट से हराया था। रॉय को इस चुनाव में 3905 और सीईएमलीह को 3163 वोट मिले थे। साल 1988 में रॉय ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए एस. गेलमेंडर सिंह लिंग्दोह को 418 वोटों से हराया था। जहां रॉय को 2110 वोट मिले, वहीं लिंग्दोह को 1692 वोट मिले थे। साल 1983, 1978 और 1972 में एएचएल के उम्मीदवार ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
Paid my last respect to our departed leader Late Dr. Donkupar Roy, Hon’ble Speaker of Meghalaya Legislative Assembly.
— Conrad Sangma (@SangmaConrad) July 31, 2019
Dr. Don has been a father figure to me and I will miss him a lot. May almighty grant him eternal peace. RIP sir. pic.twitter.com/1QBNd4xbl7
Representatives of the MDA Government paid respect to departed leader Dr. Donkupar Roy at his residence in #Shillong. pic.twitter.com/Gk5lDrFt2I
— Conrad Sangma (@SangmaConrad) July 29, 2019
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