दोनकुपर रॉय से कभी जीत नहीं पाई कांग्रेस, लगातार 7 बार चटाई थी धूल

मेघालय विधानसभा के अध्यक्ष दोनकुपर रॉय का रविवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 65 वर्ष के थे। राय को पेट की जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए 18 जुलाई को दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरूग्राम में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने रविवार को दोपहर बाद दो बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली। राय युनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी(यूडीपी) के अध्यक्ष थे। उनकी पार्टी मेघालय में सत्तारुढ मेघाालय डेेमोक्रेटिक गठबंधन में शामिल हैं। वह मार्च 2018 में मेघालय विधानसभा के अध्यक्ष चुने गये थे। दोनकुपर रॉय 2018 में लगातार 7वीं बार जीत दर्ज की थी। रॉय यूडीपी के टिकट पर पांच बार और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दो बार जीत दर्ज की थी। रॉय 2008 से 2009 तक मेघालय के मुख्यमंत्री भी रहे थे।बता दें कि मेघालय विधानसभा की शेल्ला सीट की तो इस सीट पर कांग्रेस कभी जीत नहीं पाई। इस सीट से दोनकुपर रॉय ने 2018 के विधानसभा चुनाव में लगातार 7वीं बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने अबतक यूडीपी के टिकट पर 5 बार और निर्दलीय दो बार जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव में इस सीट पर उन्होंने पीडीएफ के लेस्टन वन्सवेट को 370 वोटों से हराया था। रॉय को 8280 और वन्सवेट को 7910 वोट मिले थे। इस सीट से रॉय 1988 से 2018 तक 7 विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी।बता दें कि रॉय यूडीपी की सरकार में 365 दिनों के लिए 19 मार्च 2008 से 18 मार्च 2009 तक मेघालय के 10वें मुख्यमंत्री भी रहे। साल 2013 में यूडीपी के रॉय ने निर्दलीय उम्मीदवार लिस्टों वंसवेत को 355 वोटों से हराया था। रॉय को 5940 और वंसवेत को 5585 वोट मिले थे। साल 2008 में रॉय ने कांग्रेस उम्मीदवार वंसवेत को 939 वोटों से हराया था। रॉय को 4238 और वंसवेत को 3299 वोट मिले थे। इससे पहले रॉय ने 2003 में केएचएनएएम के पिंडैपब्रोथ्मू सेबों को 222 वोटों से हराया था। रॉय को 3145 और सेबों को 2923 वोट मिले थे।1998 में दोनकुपर रॉय ने जी. ग्रांडेर्सन सीईएमलीह को 811 वोटों से हराया था। रॉय को 3773 और सीईएमलीह को 2962 वोट मिले थे। साल 1993 में भी रॉय ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए सीईएमलीह को 742 वोट से हराया था। रॉय को इस चुनाव में 3905 और सीईएमलीह को 3163 वोट मिले थे। साल 1988 में रॉय ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए एस. गेलमेंडर सिंह लिंग्दोह को 418 वोटों से हराया था। जहां रॉय को 2110 वोट मिले, वहीं लिंग्दोह को 1692 वोट मिले थे। साल 1983, 1978 और 1972 में एएचएल के उम्मीदवार ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
I am deeply pained to learn of the demise of Dr Donkupar Roy, Speaker of Meghalya Assembly.A tall leader and former Chief Minister Dr Roy leaves behind a rich legacy of meaningful politics & constructive public life.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 28, 2019
I offer my heartfelt condolences to the family @SangmaConrad pic.twitter.com/Togllv7Xjs
Deeply saddened by the untimely demise of Speaker of Meghalaya Assembly Dr Donkupar Roy. We have lost a leader, a mentor, who had dedicated his life for the service of the people. May Almighty provide strength to his family in this hour of grief. May his soul RIP ?
— Conrad Sangma (@SangmaConrad) July 28, 2019
Deeply saddened to know of the unfortunate and untimely death of Donkupar Roy (64). He was the Speaker of Meghalaya legislative assembly,a former Chief Minister of Meghalaya and the President of the United Democratic Party. RIP, Om Shanti.
— Tathagata Roy (@tathagata2) July 28, 2019
Saddened to learn about the demise of former Meghalaya CM & Speaker of the Legislative Assembly Dr. Donkupar Roy.
— Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) July 28, 2019
My sincere condolences to the bereaved family members and well-wishers.
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