वैलीज ऑफ नो रिटर्न का शिकार AN-32, जो विमान गया कभी नहीं लौटा

हाल ही में हुए एएन-32 विमान के हादसे ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश के ऊपर से उड़ान भरने के रहस्यमयी इतिहास की याद दिला दी है। आपको बता दें कि इंडियन एयरफोर्स ने असम में 3 जून को अरुणाचल के मेचुका एय़रफील्ड के लिए उड़े एएन 32 एयरक्राफ्ट और उसमें सवार 13 सैनिकों की मौत की पुष्टि कर दी है। हादसे में मारे गए 13 लोगों में 6 अधिकारी और 7 एयरमैन हैं। 3 जून से लापता इस एयरक्राफ्ट के सर्च आपरेशन में वायुसेना के अलावा सेना, नौसेना, खुफिया एजेंसियां, आईटीबीपी और पुलिस के जवान लगे हुए थे। विमान का मलबा दिखने के बाद यहां तक पहुंचने के लिए एक 15 सदस्यीय विशेषज्ञ दल को हेलीकॉप्टर से उतारा गया था। इसमें एयरफोर्स, आर्मी के जवान और पर्वतारोही शामिल थे।अरुणाचल प्रदेश के तीन स्थानीय पर्वतारोही जब इसी साल फरवरी में जड़ी-बूटी की खोज में सुरिंधी पहाड़ी पर गए तो उन्हें जड़ी-बूटियां तो नहीं मिलीं लेकिन उन्होंने 75 साल से लापता एक हवाई जहाज़ ज़रूर ढूंढ़ निकाला और उन्होंने जिस विमान को ढूढ़ निकाला वो अमेरिकी वायुसेना का विमान था जो दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान चीन में जापानियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में मदद करने के लिए असम के दिनजान एयरफील्ड से उड़ा था। दूसरे विश्वयुद्ध में 42 महीने तक चले इस बेहद आत्मघाती अभियान को FLYING THE HUMP कहते थे, जिसमें लापता लोगों की तलाश करने आज भी अमेरिकी सरकार अरुणाचल प्रदेश में अपने दल भेजती है।दुनिया में ऐसी कई सारी रहस्यमयी चीजें हैं जिनके बारे में खुलासा होना अभी बाकी है, ऐसी कई जगह हैं जिसके रहस्य को आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। हम बात कर रहे हैं बरमूडा ट्राएंगल की। दरअसल बरमूडा ट्राएंगल से जब कोई जहाज गुजरता है तो वह उसे अपने अंदर ही ले लेता है। यहां तक कि आसमान में उड़ने वाले विमानों को भी यह अपने अंदर खींच लेता है। अब तक यहां कई सारे जहाज लापता हो चुके हैं जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला है। कुछ ऐसा ही हाल अरुणाचल प्रदेश की इस घाटी का है जिसका इतिहास गवाह है कि जो भी विमान इसके पास से गुजरा है उसका सालों साल नामों निशान तक नहीं मिला।आइए अब जानते हैं कि आखिर क्यों इस एरिया में इतनी बड़ी तादात में विमान क्रैश होने की घटना होती है। हालांकि ये कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि FLYING THE HUMP मिशनों के दौरान इतनी बड़ी तादाद में एय़रक्रैश क्यों हुए,लेकिन अलग-अलग रिसर्च में एक बात निकलकर आई कि यहां के आसमान में बहुत ज्यादा टर्बुलेंस और 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा यहां की घाटियों के संपर्क में आने पर एक ऐसी स्थिति बनाती है कि यहां उड़ान बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। वहीं यहां के घाटियां औऱ घने जंगलों में गिरे हुए किसी विमान के मलबे को तलाश करना ऐसा मिशन बन जाता है जिसके पूरा होने में कई बार कई दशक लग जाते हैं।
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