राजस्थान की शान है ये महल, ये नहीं देखा तो कुछ भी नहीं देखा!

भारत में बहुत सारे किले और महल है, जिनका अपना अलग- अलग इतिहास और महत्व रहा है। राजस्थान के किलों को भारत की शान माना जाता हैं। इसमें उदयपुर शहर राजस्थान के सबसे बहुत खूबसूरत शहरों में आता है। दुनिया भर से लोग यहां घूमने आते है। उदयपुर की खास महलों में से घूमने के लिए जो सबसे ज्यादा मशहूर है, वो सिटी पैलेस है। यह पैलेस राजस्थान के बड़े शाही महलों में से एक है। तकरीबन 400 साल पहले इस पैलेस का निर्माण शुरू किया गया था। सिटी पैलेस को महाराणा उदय सिंह ने 1569 में बनवाना शुरू किया था। इस के बाद जो भी इस पैलेस के राजा बने, उन्होंने इसे अपने-अपने शासन काल में पूरा करवाया। इस पैलेस का निर्माण 11 पड़ांव में पूरा किया गया था। यह पैलेस एक पहाड़ी की चोटी पर बनाया गया है। हैरानी की बात तो यह है इतने पड़ांवों के पूरा होने के बाद भी इसके दिखने में कोई अंतर नहीं है।इस पैलेस के परिसर में 11 महल अब भी मौजूद हैं। जिनमें 22 अलग- अलग राजाओं ने राज किया है। वैसे तो यह सभी महल देखने में सुंदर है, लेकिन इनमें शीश महल, मोर चौंक, मोती महल और कृष्णा विलास सबसे ज्यादा अपनी और आकृषित करते है। पैलेस के अंदर कई गुंबद, आंगन, गलियारे, कमरे, मंडप, टावर, और हैंगिंग गार्डन हैं, जो कि पैलेस की सुंदरता को और भी बढ़ाते हैं।यह पैलेस पिछोला झील के किनारे एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। जहां से पूरे शहर को देखा जा सकता है। और महलों की तरह इस महल में भी बहुत दरवाजे है। ग्रेट गेट महल का मुख्य दरवाजा है। एक द्वार जिसके करीब एक क्षेत्र है जहां हाथियों की लड़ाई हुआ करती थी, उसको त्रिधनुषाकार द्वार या फिर त्रिपोलिया द्वार भी कहते है। इस पैलेस में राजाओं को चांदी और सोने से तौला जाता था, तौलने के बाद जितना भी सोना और चांदी होता था, उसे गरीबों में बांट दिया जाता था।पैलेस की सबसे खास बात यह है कि यहां एक कमरे में पंखा रखा हुआ है। जिसे चलाने के लिए 220 वोल्ट के करेंट की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह पंखा मिट्टी के तेल से आज भी चलता है। पहले तेल जलता है, तो उसकी गर्मी से हवा का दबाव बनता है। हवा के इस दबाव से पंखे का अंदरूनी हिस्सा घूमता है और पंखा चलने लगता है।भीम विलास नाम के महल को हिंदू देवी-देवता, राधा और कृष्ण के चित्रों के साथ सजाया गया है। इस पैलेस के अंदर एक जगदीश मंदिर भी है, जिसे उदयपुर के सबसे बड़े मंदिर के रूप में जाना जाता है। इस पैलेस में घूमने का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक है। लेकिन इंडियन फेस्टिवल वाले दिनों में ये बंद होता है।
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