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देखनी है सर्दी की रौनक तो जाएं औली, मानों बिछी हो रुई


अक्सर लोग गर्मियों में हिल स्टेशन का प्लान करते हैं लेकिन सर्दी में इसका मजा आैर भी बढ़ जाता है। अगर आप घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो औली जा सकते हैं। चमोली जिले स्थित इस हिल स्टेशन में गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में ज्यादा चहल-पहल होती है। जिला चमोली में जोशीमठ के पास समुद्रतल से 9 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित औली गढ़वाल एक पॉप्युलर टूरिस्ट प्लेस है। यहां से चारों ओर की खूबसूरत पहाड़ियों व जंगल का नजारा लिया जा सकता है। औली जाने के लिए बस सेवा नहीं है, लेकिन जोशीमठ से प्राइवेट टैक्सियां मिल जाती हैं। औली तक पहुंचने के लिए रोप वे का भी बढ़िया इंतजाम है। इसकी स्पीड देश के बाकी रोप वे से अधिक मानी जाती है। देवदार के घने जंगल से होते हुए यह ढलानों के ऊपरी छोर तक पहुंच जाता है। ऊंचाई के कारण ऐसा लगता है कि मानों आप बादल के बीच में उड़ रहे हों। इससे दूर-दर तक बर्फ से ढकी पहाड़ियों को भी आप दूरबीन की मदद से साफ देख सकते हैं। मानों बिछी हो रुई बुग्याल एक गढ़वाली शब्द है, जिसे हिंदी में चारागाह कहते हैं। यह 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अगर धूप हो तो हिमालय की पहाड़ियां यहां ऐसे दिखती हैं मानों चारों तरफ रुई बिछा दी गई हो। ठहरने की व्यवस्था यहां ठहरने के लिए गढ़वाल विकास निगम ने एक गेस्ट हाउस बनाया हुआ है जिसमें लगभग 110 रूम हैं। सभी तरह के बजट वालों के लिए यह सुविधाजनक है। भारत-तिब्बत पुलिस का भी यहां पर रेस्ट्रॉन्ट है। वैसे यहां ठहरने के लिए कॉटेज और हट की व्यवस्था भी है। आप चाहें तो यहां से घूमने के बाद ठहरने के लिए जोशीमठ भी जा सकते हैं। जोशीमठ में ढेरों होटल व गेस्ट हाउस हैं। कैसे पहुंचें औली पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून के पास जौली ग्रांट है, जो जोशीमठ से 273 किलोमीटर दूर है। यहां से बस व टैक्सी से औली पहुंचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है, जो यहां से तकरीबन 299 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। बेस्ट सीजन: नवंबर से अप्रैल के बीच

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