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एक एेसा क्रिकेटर, जो पेशे से है पत्रकार, मैच के बाद करता है कुछ ऐसा...


ऐसा बहुत कम देखने के मिलता है कि कोर्इ अपनी नौकरी के साथ साथ अपने पैशन को भी जिंदा रखे। पेशे की भाग दौड़ में वह अपने पैशन और शौक को इतना पीछे छोड़ देते हैं कि वापस जाने का रास्‍ता तक भूल जाते हैं, लेकिन हम आपको उससे मिलवाते हैं, जो अपने पैशन के साथ साथ अपनी नौकरी को भी बखूबी कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज संदीप कुमार ठाकुर की जो पेशे से पत्रकार है। संदीप ऐसे पत्रकार और क्रिकेटर है, जो एक समय में अपनी दोनों जिम्‍मेदारी निभाते हैं। मैच के दौरान वह‍ क्रिकेटर की भूमिका में होते हैं और मैच खत्‍म होने के बाद पत्रकार की जिम्‍मेदारी निभाते हैं और उसी मैच की रिपोर्ट को अपने अखबार को भेजते हैं।अरुणाचल फ्रंट के लिए करते हैं काम संदीप हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की ओर से विजय हजारे ट्रॉफी में भी खेलते दिखाई दिए। वो अरुणाचल प्रदेश के एक अखबार अरुणाचल फ्रंट के लिए काम करते हैं। वो जिन मैचों में खेलते हैं रोजाना उनकी रिपोर्ट भी वो अखबार को भेजते हैं। कई बार ये रिपोर्ट्स उनके नाम से प्रकाशित होती हैं। पहली बार किसी क्रिकेटर ने खेलते हुए रिपोर्टिंग की आम तौर पर हमने क्रिकेट खिलाड़ियों को करियर खत्म होने के बाद कॉमेन्ट्री करते या अखबारों के लिए कॉलम लिखते देखा है। लेकिन ये अपने आप में संभवत: भारतीय क्रिकेट में पहला मौका है जब क्रिकेट खिलाड़ी क्रिकेट खेलते हुए रिपोर्टिंग कर रहा है। एक सफल गेंदबाज हैं संदीपसाल 2018–19 क्रिकेट सीजन में विजय हजारे ट्राॅफी के दौरान उत्तराखंड के खिलाफ लिस्ट ए करियर की शुरुआत करने वाले संदीप अपनी टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 5 मैचों में 26.00 की औसत और 5.62 की इकोनॉमी से 8 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नागालैंड के खिलाफ रहा जहां उन्होंने 52 रन देकर 3 विकेट लिए। अरुणाचल प्रदेश की टीम इस साल रणजी ट्रॉफी में खेल रही और संदीप इस टीम में भी शामिल हैं। अरुणाचल की टीम रणजी ट्रॉफी के सीजन की शुरुआत 1 नवंबर को मेघालय के खिलाफ शिलांग में करने जा रही है। अरुणाचल की टीम को सीजन में 8 मैच खेलने हैं।ड्रिबलिंग के बादशाह शाहिद ने की थी इस परंपरा की शुरूआतड्रिबलिंग के बादशाह के रूप में जाने जाने वाले भारतीय हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद टीम में रहते हुए अखबारों के लिए कॉलम लिखा करते थे। उन्होंने हॉकी में इस तरह की परंपरा की शुरुआत की थी। शाहिद का निधन जुलाई 2016 में हो गया था।

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