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Tripura में इन पांच वजहों से जीती थी भाजपा,वामपंथियों का सूपड़ा साफ


असम,मणिपुर,अरुणाचल के बाद त्रिपुरा में भी भाजपा अपनी सरकार बनाने जा रही है। भाजपा ने यहां भारी बहुमत से जीत दर्ज कर लेफ्ट के किले को ढहा दिया है। त्रिपुरा में 1993 के बाद से ही सीपीएम के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट सत्ता में था। पश्चिम बंगाल के बाद अब यह किला ढहना लेफ्ट के लिए चिंता की बात है। असम में पूर्वोत्तर की अपनी पहली सरकार बनाने वाली भाजपा के बारे में तीन साल पहले कोई यह नहीं कह सकता था कि वह त्रिपुरा में भी अपना परचम लहराएगी। त्रिपुरा में 2013 में 1.5 फीसद वोट हासिल करने वाली और अपना खाता भी नहीं खोलने वाली भाजपा को यह चौंकाने वाली कामयाबी मिलने की कई वजहें हैं।1. बीते 25 सालों से यहां सीपीएम के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट की सरकार थी। मुख्यमंत्री माणिक सरकार छवि ईमानदार नेता की रही लेकिन निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को वह रोकने में असफल रहे।2. भाजपा ने त्रिपुरा में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा दी। भाजपा की नॉर्थ ईस्ट सेल के प्रमुख सुनील देवधर ने बीते दो से तीन सालों में यहां संगठन को मजबूत करने का काम किया।3. भाजपा के लिए योगी फैक्टर भी अहम रहा। त्रिपुरा में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिन 7 जगहों पर सभाओं को संबोधित किया, उनमें से 5 स्थानों पर भाजपा को जीत मिली। इसकी बड़ी वजह त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय की बड़ी आबादी होना भी है।4.भाजपा ने चुनाव से पहले संगठन को कसते हुए पन्ना प्रमुख की रणनीति पर काम किया। इसके चलते वह काडर को उत्साहित करने में सफल रही और गली गली तक अपने संपर्क को मजबूत करने का काम किया,जो वोटों में तब्दील हुआ।5.कांग्रेस इस राज्य में तेजी से कमजोर हुई है। इसके कई दिग्गज नेताओं को भाजपा ने अपने पाले में लाने में सफल रही।

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