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भारत की खुफिया एजेंसी I B और RAW पर लगा गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट को देना पड़ा दखल


उच्चतम न्यायालय ने केंद्र के साथ ही असम और मेघालय की सरकारों से एक लापता व्यक्ति के बेटे की याचिका पर जवाब मांगा है। लापता व्यक्ति रेवती फूकन भारत सरकार और अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (अल्फा) के बीच 1991 से ही शांति बरतने के लिए मध्यस्थता कर रहा था। मध्यस्थता करने वाले फूकन के बेटे का दावा है कि उनके पिता 22 अप्रैल को लापता हो गए थे। उन्होंने अल्फा प्रमुख परेश बरुवा के बयान को उद्धत किया कि वह खुफिया ब्यूरो (आईबी) या रिसर्च एवं एनालिसिस विंग (रॉ) की हिरात में हो सकते हैं, क्योंकि उनके बीच प्रतिद्वंदिता है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमएम शांतानागौदर की अवकाशकालीन पीठ ने केंद्र, असम और मेघालय सहित विभिन्न पक्षों को नोटिस जारी किया है। फूकन की तरफ से पेश हुई वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने दावा किया है कि कुछ दिनों पहले मेघालय में एक चिकित्सक ने कथित तौर पर उनका उपचार किया था। लूथरा ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री ने फूकन को तलास करने में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन उन्हें पता नहीं है कि क्या वह हिरासत में है, क्योंकि इसमें कई केंद्रीय एजेंसियां संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि यह बेटे की तरफ से दायर बंदी प्रत्यीक्षणकरण याचिका है जो अपने लापता पिता को खोजने का निर्देश देने की मांग करता है। पीठ ने लूथरा से कहा कि राहत के लिए आप वहां के न्यायालय का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते। आप पूर्वोत्तर से दिल्ली क्यों आए हैं। वो भी वह काम कर सकते हैं जो हम कर सकते हैं। लूथरा ने कहा कि इसमें दो राज्य और कई केंद्रीय एजेंसियां संलिप्त हैं। पीठ ने कहा कि चूंकि दो राज्य इसमें शामिल है इसलिए वह संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर रहा है।

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